📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / P Jeganathan
कृषि
मनिपुर के जंगलों में पॉपियों की जगह बांस का विस्तार, पीसीसीएफ ने बताया
✍️ The Hindu
🗓 10 अक्टू. 2026, 04:17 AM
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पीसीसीएफ के अनुसार, बांस तेजी से मनिपुर के जंगलों में पॉपियों की जगह ले रहा है, जिससे अवैध फसल में बदलाव दिख रहा है।
मनिपुर के घने जंगलों में बांस ने उन क्षेत्रों में बढ़त बना ली है जहाँ पहले पॉपियों की खेती होती थी, यह बात पीसीसीएफ की हालिया जाँच से स्पष्ट हुई है। क्षेत्रीय निरीक्षणों से पता चलता है कि तेज़ी से बढ़ने वाला बांस, ओपियम पॉपियों को पीछे छोड़ रहा है, जो पहले इन दूरस्थ हिस्सों में उगाई जाती थीं।
बांस की प्राकृतिक सहनशीलता और कम इनपुट की आवश्यकता इसे पॉपियों से अलग बनाती है, जबकि पॉपियों को विशेष परिस्थितियों और गुप्त देखरेख की जरूरत होती है। स्थानीय अधिकारियों का मानना है कि बांस के प्रसार में अवैध ड्रग फार्मों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भी योगदान हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव के दोहरे प्रभाव हो सकते हैं। पॉपियों में कमी से मादक पदार्थों का उत्पादन घट सकता है, परन्तु बांस की तेज़ी से बढ़ती उपस्थिति जैव विविधता और भूमि उपयोग पैटर्न को प्रभावित कर सकती है, जिससे निगरानी और सामुदायिक प्रबंधन की आवश्यकता उत्पन्न होती है।
पीसीसीएफ ने राज्य अधिकारियों से इस परिवर्तन को बारीकी से दर्ज करने और बांस के आर्थिक संभावनाओं—जैसे सतत कटाई—को वन‑आधारित समुदायों के आजीविका कार्यक्रमों में शामिल करने की सलाह दी है।
बांस की प्राकृतिक सहनशीलता और कम इनपुट की आवश्यकता इसे पॉपियों से अलग बनाती है, जबकि पॉपियों को विशेष परिस्थितियों और गुप्त देखरेख की जरूरत होती है। स्थानीय अधिकारियों का मानना है कि बांस के प्रसार में अवैध ड्रग फार्मों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भी योगदान हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव के दोहरे प्रभाव हो सकते हैं। पॉपियों में कमी से मादक पदार्थों का उत्पादन घट सकता है, परन्तु बांस की तेज़ी से बढ़ती उपस्थिति जैव विविधता और भूमि उपयोग पैटर्न को प्रभावित कर सकती है, जिससे निगरानी और सामुदायिक प्रबंधन की आवश्यकता उत्पन्न होती है।
पीसीसीएफ ने राज्य अधिकारियों से इस परिवर्तन को बारीकी से दर्ज करने और बांस के आर्थिक संभावनाओं—जैसे सतत कटाई—को वन‑आधारित समुदायों के आजीविका कार्यक्रमों में शामिल करने की सलाह दी है।