📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rambaran Pal
खेल
बैतूल के दिव्यांग तैराक रामबरन पाल ने 21 घंटे में इंग्लिश चैनल पार कर तिरंगा लहराया
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 26 सित. 2026, 01:31 PM
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विक्रम अवॉर्डी तैराक रामबरन पाल ने 21 घंटे 20 मिनट में डोवर से फ्रांस तक 42 किलोमीटर की दूरी तय कर तिरंगा फहराया।
मध्य प्रदेश के बैतूल के विक्रम अवॉर्डी दिव्यांग तैराक रामबरन पाल ने इंग्लिश चैनल को पार कर इतिहास रचा। उन्होंने इंग्लैंड के डोवर से शुरू करके 21 घंटे 20 मिनट लगातार तैरते हुए 42 किलोमीटर से अधिक दूरी तय की और फ्रांस के तट पर पहुँचे।
समाप्ति पर उन्होंने भारतीय तिरंगा फहराया, जिससे व्यक्तिगत दृढ़ता और राष्ट्रीय गर्व दोनों का प्रतीक बना। यह भारत के किसी भी दिव्यांग तैराक द्वारा चैनल पार करने की पहली सफल कोशिश है।
चैनल स्विमिंग एसोसिएशन ने अवधि और दूरी की पुष्टि की और बताया कि पाल ने सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया। उनके परिवार और मध्य प्रदेश के समर्थकों ने इस उपलब्धि को राज्य में खेल के प्रति नई प्रेरणा कहा।
डोवर में सुबह के समय शुरू हुई इस तैराकी को स्वयंसेवकों की टीम ने निरंतर निगरानी की और मीडिया को अपडेट दिया। पाल की सफलता से विभिन्न शारीरिक क्षमताओं वाले एथलीटों को एन्ड्यूरेंस स्पोर्ट्स में भाग लेने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
अब रामबरन पाल इस उपलब्धि को आधार बनाकर अपने राज्य में दिव्यांगों के लिए स्विमिंग कार्यक्रमों को बढ़ावा देना चाहते हैं, ताकि समावेशी खेल विकास को गति मिल सके।
समाप्ति पर उन्होंने भारतीय तिरंगा फहराया, जिससे व्यक्तिगत दृढ़ता और राष्ट्रीय गर्व दोनों का प्रतीक बना। यह भारत के किसी भी दिव्यांग तैराक द्वारा चैनल पार करने की पहली सफल कोशिश है।
चैनल स्विमिंग एसोसिएशन ने अवधि और दूरी की पुष्टि की और बताया कि पाल ने सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया। उनके परिवार और मध्य प्रदेश के समर्थकों ने इस उपलब्धि को राज्य में खेल के प्रति नई प्रेरणा कहा।
डोवर में सुबह के समय शुरू हुई इस तैराकी को स्वयंसेवकों की टीम ने निरंतर निगरानी की और मीडिया को अपडेट दिया। पाल की सफलता से विभिन्न शारीरिक क्षमताओं वाले एथलीटों को एन्ड्यूरेंस स्पोर्ट्स में भाग लेने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
अब रामबरन पाल इस उपलब्धि को आधार बनाकर अपने राज्य में दिव्यांगों के लिए स्विमिंग कार्यक्रमों को बढ़ावा देना चाहते हैं, ताकि समावेशी खेल विकास को गति मिल सके।