📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Nilimajhapate
धर्म
उज्जैन: रक्षाबंधन पर बाबा महाकाल को पहली राखी, 6 विशेष राखियां अर्पित
✍️ Amar Ujala · Ujjain
🗓 28 अग. 2026, 08:20 AM
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रक्षाबंधन के अवसर पर उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर में पहली राखी, छह विशेष राखियां और सवा लाख लड्डुओं का महाभोग अर्पित कर श्रद्धालुओं ने श्रावण उपवास पूरा किया।
उज्जैन, मध्य प्रदेश – बाबा महाकाल मंदिर में भस्म आरती के दौरान रक्षाबंधन की पहली राखी देवता को अर्पित की गई, जिससे त्योहार की शुरुआत हुई। इस अवसर पर छह विशेष रूप से तैयार की गई राखियां, प्रत्येक में अलग‑अलग डिज़ाइन के साथ, बंधी गईं।
साथ ही सवा लाख से अधिक लड्डुओं का महाभोग किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने बड़े उत्साह से देखा। लड्डुओं की भरमार ने मंदिर के परिसर में बड़ी भीड़ को आकर्षित किया, जहाँ लोग प्रार्थना और प्रसाद प्राप्त करने के लिए इकट्ठा हुए।
श्रावण माह में उपवास रखे कई भक्तों ने इस अनुष्ठान को अपने व्रत की समाप्ति के रूप में माना। आरती के बाद उन्होंने प्रसाद के रूप में वितरित लड्डुओं को ग्रहण किया, जिससे सुरक्षा और कल्याण की कामना की गई।
मंदिर प्रबंधकों ने बताया कि रक्षाबंधन पर बाबा महाकाल को सम्मानित करना एक पुरानी परंपरा है, जो भाई‑बहन के बंधन और सुरक्षा के प्रतीक को उजागर करती है। भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को विशेष रूप से व्यवस्थित किया गया।
समारोह के अंत में मंत्रोच्चार और शेष लड्डुओं का वितरण किया गया, जिससे समुदाय में आपसी सौहार्द और उत्सव की भावना और भी प्रबल हुई।
साथ ही सवा लाख से अधिक लड्डुओं का महाभोग किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने बड़े उत्साह से देखा। लड्डुओं की भरमार ने मंदिर के परिसर में बड़ी भीड़ को आकर्षित किया, जहाँ लोग प्रार्थना और प्रसाद प्राप्त करने के लिए इकट्ठा हुए।
श्रावण माह में उपवास रखे कई भक्तों ने इस अनुष्ठान को अपने व्रत की समाप्ति के रूप में माना। आरती के बाद उन्होंने प्रसाद के रूप में वितरित लड्डुओं को ग्रहण किया, जिससे सुरक्षा और कल्याण की कामना की गई।
मंदिर प्रबंधकों ने बताया कि रक्षाबंधन पर बाबा महाकाल को सम्मानित करना एक पुरानी परंपरा है, जो भाई‑बहन के बंधन और सुरक्षा के प्रतीक को उजागर करती है। भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को विशेष रूप से व्यवस्थित किया गया।
समारोह के अंत में मंत्रोच्चार और शेष लड्डुओं का वितरण किया गया, जिससे समुदाय में आपसी सौहार्द और उत्सव की भावना और भी प्रबल हुई।