📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Suyash Dwivedi
स्वास्थ्य
भोपाल में आयुष इंटर्न डॉक्टरों ने ₹9,383 मानदेय के विरोध में प्रदर्शन, पश्चिम बंगाल‑ओडिशा के उच्च मानदेय का हवाला
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 22 सित. 2026, 05:31 PM
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मंगलवार को 100 से अधिक आयुष इंटर्न डॉक्टरों ने भोपाल कलेक्टरेट में 9,383 रुपये के मानदेय में वृद्धि की मांग की, जबकि पश्चिम बंगाल में 33,099 और ओडिशा में 30,000 रुपये तक मिलते हैं।
मंगलवार को 100 से अधिक आयुष इंटर्न डॉक्टरों ने भोपाल कलेक्टरेट के बाहर 9,383 रुपये के मासिक मानदेय के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रशिक्षण के अंतिम चरण में रहने वाले इन डॉक्टरों ने प्लाकर्ड लेकर अपनी असंतुष्टि व्यक्त की।
इन डॉक्टरों ने बताया कि पश्चिम बंगाल में समान इंटर्नशिप के लिए 33,099 रुपये और ओडिशा में 30,000 रुपये तक का मानदेय मिलता है। वे इस अंतर को अपने राज्य में प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान और मनोबल में गिरावट का कारण मानते हैं।
इंटर्नों के प्रतिनिधियों ने कलेक्टरेट अधिकारियों से मानदेय में तत्काल वृद्धि की मांग की। रिपोर्टिंग के समय तक जिला प्रशासन ने कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया था, और प्रदर्शन शांति से जारी रहा।
आयुष इंटर्न, जो पारम्परिक एवं वैकल्पिक चिकित्सा प्रणालियों में कार्य करते हैं, अपने प्रशिक्षण के दौरान जीवनयापन के खर्चों को पूरा करने के लिए इस स्टाइपेंड पर निर्भर होते हैं। अन्य राज्यों के समान वेतन की मांग राज्य में चिकित्सा प्रतिभा को बनाए रखने की व्यापक चिंता को दर्शाती है।
यह प्रदर्शन राज्य सरकारों पर स्वास्थ्य प्रशिक्षुओं के लिए वेतन नीतियों को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने का दबाव बढ़ा रहा है, जिससे सभी क्षेत्रों में समान व्यवहार सुनिश्चित हो सके।
इन डॉक्टरों ने बताया कि पश्चिम बंगाल में समान इंटर्नशिप के लिए 33,099 रुपये और ओडिशा में 30,000 रुपये तक का मानदेय मिलता है। वे इस अंतर को अपने राज्य में प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान और मनोबल में गिरावट का कारण मानते हैं।
इंटर्नों के प्रतिनिधियों ने कलेक्टरेट अधिकारियों से मानदेय में तत्काल वृद्धि की मांग की। रिपोर्टिंग के समय तक जिला प्रशासन ने कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया था, और प्रदर्शन शांति से जारी रहा।
आयुष इंटर्न, जो पारम्परिक एवं वैकल्पिक चिकित्सा प्रणालियों में कार्य करते हैं, अपने प्रशिक्षण के दौरान जीवनयापन के खर्चों को पूरा करने के लिए इस स्टाइपेंड पर निर्भर होते हैं। अन्य राज्यों के समान वेतन की मांग राज्य में चिकित्सा प्रतिभा को बनाए रखने की व्यापक चिंता को दर्शाती है।
यह प्रदर्शन राज्य सरकारों पर स्वास्थ्य प्रशिक्षुओं के लिए वेतन नीतियों को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने का दबाव बढ़ा रहा है, जिससे सभी क्षेत्रों में समान व्यवहार सुनिश्चित हो सके।