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अथमलगोला रेलवे स्टेशन पर लापरवाही की तस्वीर, कई दिनों से लगातार बह रहा पेयजल
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सामने बैठे कर्मचारियों को नहीं दिखती पानी की बर्बादी।स्टेशन पैनल ऑफिस के सामने बहता रहता है पानी, जिम्मेदार बेखबर।
पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल अंतर्गत अथमलगोला रेलवे स्टेशन पर रेलवे की लापरवाही और जल संरक्षण के दावों की पोल खोलती तस्वीर सामने आई है। प्लेटफॉर्म संख्या 3-4 पर यात्रियों की सुविधा के लिए लगाए गए मोटर नल से पिछले कई दिनों से सैकड़ों लीटर पानी यूं ही बहकर बर्बाद हो रहा है। वजह महज इतनी है कि नल की टोंटी खराब है अथवा उसके स्थान पर नई टोंटी लगाने की जरूरत है।हैरानी की बात यह है कि जहां से पानी लगातार बह रहा है, उसके ठीक सामने स्टेशन पैनल कार्यालय मौजूद है।
स्टेशन पर तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों की नजर इस स्थान पर दिनभर पड़ती होगी, लेकिन इसके बावजूद किसी ने अब तक न तो नल की टोंटी बदलवाने की जहमत उठाई और न ही संबंधित विभाग या अधिकारी को इसकी सूचना देना जरूरी समझा।यात्रियों का आरोप है कि यह समस्या कोई एक-दो घंटे की नहीं, बल्कि कई दिनों से बनी हुई है। दिन-रात लगातार पानी बहने से न केवल सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है, बल्कि रेलवे की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जब एक मामूली टोंटी को बदलने में भी कई दिनों का समय लग जाए, तो फिर रेलवे की जल संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या स्टेशन पैनल कार्यालय के सामने होने के बावजूद किसी कर्मचारी की नजर इस बर्बादी पर नहीं पड़ी? या फिर सब कुछ देखकर भी जिम्मेदारों ने आंखें मूंद रखी हैं?एक ओर रेलवे यात्रियों से पानी की बचत करने की अपील करता है, वहीं दूसरी ओर उसके ही स्टेशन परिसर में पेयजल की ऐसी खुली बर्बादी जिम्मेदारों की संवेदनहीनता को उजागर कर रही है। महज एक टोंटी की कीमत बचाने के चक्कर में प्रतिदिन सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद होना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता।
इस सम्बंध में बात करने पर आईओडब्ल्यू बख्तियारपुर जेइ रवि कुमार ने बताया कि जांच के क्रम में यह स्टेशन कर्मियों द्वारा शिकायत मिलने पर विभाग कर्मी जाकर नल बदल देते हैं. विशेष परिस्थिति के लिए लकड़ी का गुल्ली स्टेशन कार्यालय को दिया हुआ रहता है. इसीलिए त्वरित समस्या निदान उनकी भी जिम्मेवारी है. मीडिया द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर कर्मी को भेजा जा रहा है.वही स्टेशन प्रबंधक लाल भारती ने प्रशिक्षण में रहने की जानकारी दी.
स्टेशन पर तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों की नजर इस स्थान पर दिनभर पड़ती होगी, लेकिन इसके बावजूद किसी ने अब तक न तो नल की टोंटी बदलवाने की जहमत उठाई और न ही संबंधित विभाग या अधिकारी को इसकी सूचना देना जरूरी समझा।यात्रियों का आरोप है कि यह समस्या कोई एक-दो घंटे की नहीं, बल्कि कई दिनों से बनी हुई है। दिन-रात लगातार पानी बहने से न केवल सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है, बल्कि रेलवे की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जब एक मामूली टोंटी को बदलने में भी कई दिनों का समय लग जाए, तो फिर रेलवे की जल संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या स्टेशन पैनल कार्यालय के सामने होने के बावजूद किसी कर्मचारी की नजर इस बर्बादी पर नहीं पड़ी? या फिर सब कुछ देखकर भी जिम्मेदारों ने आंखें मूंद रखी हैं?एक ओर रेलवे यात्रियों से पानी की बचत करने की अपील करता है, वहीं दूसरी ओर उसके ही स्टेशन परिसर में पेयजल की ऐसी खुली बर्बादी जिम्मेदारों की संवेदनहीनता को उजागर कर रही है। महज एक टोंटी की कीमत बचाने के चक्कर में प्रतिदिन सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद होना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता।
इस सम्बंध में बात करने पर आईओडब्ल्यू बख्तियारपुर जेइ रवि कुमार ने बताया कि जांच के क्रम में यह स्टेशन कर्मियों द्वारा शिकायत मिलने पर विभाग कर्मी जाकर नल बदल देते हैं. विशेष परिस्थिति के लिए लकड़ी का गुल्ली स्टेशन कार्यालय को दिया हुआ रहता है. इसीलिए त्वरित समस्या निदान उनकी भी जिम्मेवारी है. मीडिया द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर कर्मी को भेजा जा रहा है.वही स्टेशन प्रबंधक लाल भारती ने प्रशिक्षण में रहने की जानकारी दी.