📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Mozzworld
कृषि
असम का देशी थेकेरा फल विश्व न्यूट्रास्यूटिकल बाजार में अनछुआ संभावनाओं के रूप में देखा गया
✍️ The Assam Tribune
🗓 27 सित. 2026, 01:32 PM
👁 13
असम ट्रिब्यून ने बताया कि असम का थेकेरा फल विश्व स्तर पर न्यूट्रास्यूटिकल उत्पादों के लिए एक मूल्यवान कच्चा माल बन सकता है।
असम के पहाड़ी क्षेत्रों में उगने वाला थेकेरा, एक छोटा और खट्टा फल, अपने उच्च एंटीऑक्सीडेंट स्तर और विशिष्ट फाइटोकेमिकल्स के कारण शोधकर्ताओं और उद्योग के ध्यान में आया है। नवीनतम अध्ययनों से पता चलता है कि इस फल के अर्क को आहार पूरक, फ़ंक्शनल फ़ूड और प्राकृतिक स्वास्थ्य उत्पादों में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे यह तेज़ी से बढ़ते न्यूट्रास्यूटिकल सेक्टर में एक आशाजनक सामग्री बन रहा है।
स्थानीय कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में थेकेरा का उत्पादन सीमित स्तर पर ही होता है और मुख्यतः स्थानीय बाजारों में ताज़ा रूप में बेचा जाता है। प्रसंस्करण और निर्यात के लिए उचित बुनियादी ढाँचा न होने के कारण इसकी वाणिज्यिक संभावनाएँ अभी तक पूरी तरह से उपयोग में नहीं लाई गई हैं। अब राज्य सरकार और निजी निवेशकों से इस फल के मूल्यवर्धन श्रृंखला, जैसे मानकीकृत निष्कर्षण विधि और गुणवत्ता प्रमाणन, विकसित करने की अपील की जा रही है।
यदि ये पहल सफल होती हैं, तो थेकेरा असमी किसानों के लिए नई आय के स्रोत खोल सकता है और भारत के वैश्विक हेल्थ‑फ़ूड बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लक्ष्य में योगदान दे सकता है। असम ट्रिब्यून ने बताया कि प्रारंभिक स्तर पर पायलट प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जो इस फल की प्रभावशीलता और सुरक्षा का परीक्षण कर रहे हैं ताकि इसे न्यूट्रास्यूटिकल फॉर्मूलेशन में शामिल किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय खाद्य‑सुरक्षा मानकों के अनुरूप कठोर वैज्ञानिक सत्यापन आवश्यक होगा, लेकिन प्राकृतिक प्रोफ़ाइल के कारण यह फल क्लीन‑लेबल और पौधे‑आधारित समाधान की बढ़ती मांग वाले बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान कर सकता है।
स्थानीय कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में थेकेरा का उत्पादन सीमित स्तर पर ही होता है और मुख्यतः स्थानीय बाजारों में ताज़ा रूप में बेचा जाता है। प्रसंस्करण और निर्यात के लिए उचित बुनियादी ढाँचा न होने के कारण इसकी वाणिज्यिक संभावनाएँ अभी तक पूरी तरह से उपयोग में नहीं लाई गई हैं। अब राज्य सरकार और निजी निवेशकों से इस फल के मूल्यवर्धन श्रृंखला, जैसे मानकीकृत निष्कर्षण विधि और गुणवत्ता प्रमाणन, विकसित करने की अपील की जा रही है।
यदि ये पहल सफल होती हैं, तो थेकेरा असमी किसानों के लिए नई आय के स्रोत खोल सकता है और भारत के वैश्विक हेल्थ‑फ़ूड बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लक्ष्य में योगदान दे सकता है। असम ट्रिब्यून ने बताया कि प्रारंभिक स्तर पर पायलट प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जो इस फल की प्रभावशीलता और सुरक्षा का परीक्षण कर रहे हैं ताकि इसे न्यूट्रास्यूटिकल फॉर्मूलेशन में शामिल किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय खाद्य‑सुरक्षा मानकों के अनुरूप कठोर वैज्ञानिक सत्यापन आवश्यक होगा, लेकिन प्राकृतिक प्रोफ़ाइल के कारण यह फल क्लीन‑लेबल और पौधे‑आधारित समाधान की बढ़ती मांग वाले बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान कर सकता है।