📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / World Economic Forum from Cologny, Switzerland
बिज़नेस
अशिष्कुमार चौहान: यूपी की अगली बड़ी कंपनियां छोटे शहरों से उभरेंगी
✍️ ET Government
🗓 01 नव. 2026, 05:57 AM
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एनएसई के प्रमुख अशिष्कुमार चौहान ने कहा, उत्तर प्रदेश की अगली बड़ी कंपनियां छोटे‑शहरों से उभरेंगी, जनसंख्या और बुनियादी ढाँचे को कारण बताया।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रमुख अशिष्कुमार चौहान ने ईटी गवर्नमेंट को बताया कि उत्तर प्रदेश में अगली बड़ी कंपनियां पारंपरिक मेट्रो शहरों के बजाय छोटे‑शहरों से उभरेंगी। उन्होंने राज्य की युवा जनसंख्या, बढ़ती सड़क व डिजिटल कनेक्टिविटी और राज्य‑स्तर की नीतियों को मुख्य कारण बताया।
चौहान ने कहा कि आगरा, वाराणसी, इलाहाबाद जैसे टियर‑2‑टियर‑3 शहरों में उद्यमिता की गति बढ़ रही है, जहाँ कुशल कार्यबल और वित्तीय पहुंच बेहतर हो रही है। उन्होंने संकेत दिया कि निवेशक लखनऊ और नोएडा के अलावा नए बाजारों की तलाश में हैं।
यह टिप्पणी भारत में व्यापार के विकेंद्रीकरण के व्यापक रुझान के साथ मेल खाती है, जहाँ कंपनियां लागत‑प्रभावी स्थानों को चुन रही हैं जबकि बड़े उपभोक्ता आधार तक पहुंच बना रखती हैं। यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो अगले दशक में उत्तर प्रदेश की औद्योगिक संरचना में बड़ा बदलाव आ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लॉजिस्टिक हब और स्मार्ट सिटी जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं इस बदलाव को तेज़ कर सकती हैं, पर निरंतर नीति समर्थन और कौशल विकास आवश्यक रहेगा।
चौहान ने कहा कि जनसांख्यिकीय लाभ और सक्रिय शासन मिलकर उत्तर प्रदेश को भारत के अगले बड़े कॉरपोरेट नेताओं का जन्मस्थल बना सकते हैं।
चौहान ने कहा कि आगरा, वाराणसी, इलाहाबाद जैसे टियर‑2‑टियर‑3 शहरों में उद्यमिता की गति बढ़ रही है, जहाँ कुशल कार्यबल और वित्तीय पहुंच बेहतर हो रही है। उन्होंने संकेत दिया कि निवेशक लखनऊ और नोएडा के अलावा नए बाजारों की तलाश में हैं।
यह टिप्पणी भारत में व्यापार के विकेंद्रीकरण के व्यापक रुझान के साथ मेल खाती है, जहाँ कंपनियां लागत‑प्रभावी स्थानों को चुन रही हैं जबकि बड़े उपभोक्ता आधार तक पहुंच बना रखती हैं। यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो अगले दशक में उत्तर प्रदेश की औद्योगिक संरचना में बड़ा बदलाव आ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लॉजिस्टिक हब और स्मार्ट सिटी जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं इस बदलाव को तेज़ कर सकती हैं, पर निरंतर नीति समर्थन और कौशल विकास आवश्यक रहेगा।
चौहान ने कहा कि जनसांख्यिकीय लाभ और सक्रिय शासन मिलकर उत्तर प्रदेश को भारत के अगले बड़े कॉरपोरेट नेताओं का जन्मस्थल बना सकते हैं।