📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rohit Sharma
राजनीति
अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने सियांग जलविद्युत परियोजना पर संवाद की मांग की
✍️ The News Mill
🗓 01 नव. 2026, 08:44 AM
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अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने सियांग जलविद्युत परियोजना को लेकर सभी पक्षों से संवाद करने की अपील की, जिससे सहमति और पर्यावरणीय सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने सियांग जलविद्युत परियोजना को लेकर राज्य सरकार, केंद्र, स्थानीय समुदाय और परियोजना विकासकर्ताओं के बीच रचनात्मक संवाद की मांग की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना ऊर्जा उत्पादन के लिहाज़ से महत्वपूर्ण है, परन्तु पर्यावरणीय प्रभाव और आदिवासी जनसंख्या के विस्थापन को लेकर चिंताएँ उठी हैं।
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आगे बढ़ने के लिए पारदर्शी परामर्श और पर्यावरणीय मानकों का पालन अनिवार्य है। उन्होंने केंद्र के ऊर्जा मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय से अनुरोध किया कि सभी पक्षों की शिकायतों को सुलझाने के लिए एक मंच स्थापित किया जाए।
सियांग परियोजना, जो नदी की धारा को विद्युत में बदलने का लक्ष्य रखती है, को नदी के पारिस्थितिकी तंत्र और जनजातीय समूहों के जीवनयापन पर संभावित प्रभाव के कारण जांच का सामना करना पड़ रहा है। उपमुख्यमंत्री का यह आह्वान विकास लक्ष्य को सतत् प्रथाओं के साथ संतुलित करने की इच्छा दर्शाता है, जिससे ऊर्जा की जरूरत और पर्यावरणीय संरक्षण दोनों को सम्मान मिल सके।
हितधारकों से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले हफ्तों में मिलकर शमन उपाय, मुआवजा ढांचा और दीर्घकालिक निगरानी प्रोटोकॉल पर चर्चा करेंगे। उपमुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य सभी पक्षों के साथ सहयोग करेगा और केवल पारस्परिक सहमति के बाद ही परियोजना आगे बढ़ेगी।
यह संवाद का आह्वान क्षेत्र में एक व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है, जहाँ बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को पर्यावरणीय और सामाजिक मानकों के साथ मिलाकर मूल्यांकन किया जा रहा है, जिससे समावेशी निर्णय‑निर्धारण की महत्ता पर बल दिया जा रहा है।
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आगे बढ़ने के लिए पारदर्शी परामर्श और पर्यावरणीय मानकों का पालन अनिवार्य है। उन्होंने केंद्र के ऊर्जा मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय से अनुरोध किया कि सभी पक्षों की शिकायतों को सुलझाने के लिए एक मंच स्थापित किया जाए।
सियांग परियोजना, जो नदी की धारा को विद्युत में बदलने का लक्ष्य रखती है, को नदी के पारिस्थितिकी तंत्र और जनजातीय समूहों के जीवनयापन पर संभावित प्रभाव के कारण जांच का सामना करना पड़ रहा है। उपमुख्यमंत्री का यह आह्वान विकास लक्ष्य को सतत् प्रथाओं के साथ संतुलित करने की इच्छा दर्शाता है, जिससे ऊर्जा की जरूरत और पर्यावरणीय संरक्षण दोनों को सम्मान मिल सके।
हितधारकों से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले हफ्तों में मिलकर शमन उपाय, मुआवजा ढांचा और दीर्घकालिक निगरानी प्रोटोकॉल पर चर्चा करेंगे। उपमुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य सभी पक्षों के साथ सहयोग करेगा और केवल पारस्परिक सहमति के बाद ही परियोजना आगे बढ़ेगी।
यह संवाद का आह्वान क्षेत्र में एक व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है, जहाँ बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को पर्यावरणीय और सामाजिक मानकों के साथ मिलाकर मूल्यांकन किया जा रहा है, जिससे समावेशी निर्णय‑निर्धारण की महत्ता पर बल दिया जा रहा है।