📷 चित्र स्रोत: Flickr (CC)
शिक्षा
आर्सीपीसीआर ने लोंगडिंग से शुरू किया राज्यव्यापी बाल अधिकार जागरूकता अभियान
✍️ Northeast Today
🗓 12 सित. 2026, 03:18 PM
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आर्सीपीसीआर ने लोंगडिंग से शुरू किया राज्यव्यापी बाल अधिकार जागरूकता अभियान, जिसका उद्देश्य बच्चों के अधिकारों के बारे में जनजागरूकता बढ़ाना है।
आर्सीपीसीआर ने लोंगडिंग जिला मुख्यालय में राज्यव्यापी बाल अधिकार जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया। आयोग के अधिकारी, स्थानीय प्रशासनिक प्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस समारोह में भाग लेकर इस पहल को अपना समर्थन दिया।
अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों और समुदाय को संवैधानिक सुरक्षा, संरक्षण कानून और दुर्व्यवहार की रिपोर्टिंग के महत्व के बारे में शिक्षित करना है। इसके तहत सड़क नाट्य, स्कूल कार्यशालाएँ, सूचना पुस्तिकाओं का वितरण और स्थानीय भाषाओं में रेडियो संदेश जैसी कई गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी।
आर्सीपीसीआर ने कहा है कि यह अभियान दूरदराज़ और जनजातीय क्षेत्रों में बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाकर उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करेगा, जहाँ अक्सर कानूनी अधिकारों की जानकारी कम होती है। आयोग फीडबैक तंत्र के माध्यम से कार्यक्रम की पहुँच का मूल्यांकन करेगा और बाल श्रम, तस्करी तथा उपेक्षा के मामलों को घटाने की आशा रखता है।
राज्य प्रशासन ने लॉजिस्टिक सहायता का वादा किया है, जबकि कई NGOs ने स्वयंसेवकों की भागीदारी की पेशकश की है, जिससे बाल कल्याण को सुदृढ़ करने के लिए बहु‑पक्षीय सहयोग सुनिश्चित हो रहा है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों और समुदाय को संवैधानिक सुरक्षा, संरक्षण कानून और दुर्व्यवहार की रिपोर्टिंग के महत्व के बारे में शिक्षित करना है। इसके तहत सड़क नाट्य, स्कूल कार्यशालाएँ, सूचना पुस्तिकाओं का वितरण और स्थानीय भाषाओं में रेडियो संदेश जैसी कई गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी।
आर्सीपीसीआर ने कहा है कि यह अभियान दूरदराज़ और जनजातीय क्षेत्रों में बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाकर उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करेगा, जहाँ अक्सर कानूनी अधिकारों की जानकारी कम होती है। आयोग फीडबैक तंत्र के माध्यम से कार्यक्रम की पहुँच का मूल्यांकन करेगा और बाल श्रम, तस्करी तथा उपेक्षा के मामलों को घटाने की आशा रखता है।
राज्य प्रशासन ने लॉजिस्टिक सहायता का वादा किया है, जबकि कई NGOs ने स्वयंसेवकों की भागीदारी की पेशकश की है, जिससे बाल कल्याण को सुदृढ़ करने के लिए बहु‑पक्षीय सहयोग सुनिश्चित हो रहा है।