📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Snehrashmi
बिज़नेस
एपीआई की कमी ने गुजरात के दवा निर्माताओं को झकझोर दिया, उत्पादन में देरी की आशंका
✍️ The Times of India
🗓 28 सित. 2026, 01:16 AM
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गुजरात के फार्मास्युटिकल सेक्टर को एपीआई की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन में देरी की चिंता बढ़ी है, टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया कि गुजरात के दवा निर्माताओं को सक्रिय फार्मास्युटिकल घटकों (एपीआई) की कमी का सामना करना पड़ रहा है। यह कमी आपूर्ति श्रृंखला में बाधा उत्पन्न कर रही है और कई दवाओं के उत्पादन में देरी का कारण बन सकती है, जिन्हें राज्य की कंपनियां घरेलू और विदेश दोनों में सप्लाई करती हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि गुजरात, जो भारत के फार्मास्युटिकल उत्पादन का बड़ा हिस्सा रखता है, एपीआई के आयात पर बहुत निर्भर है। वैश्विक आपूर्ति में किसी भी व्यवधान का असर स्थानीय कारखानों पर तुरंत पड़ता है, जिससे कुछ कंपनियों को उत्पादन घटाने या वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता खोजने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
इस स्थिति ने अधिक स्टॉक बफ़र रखने और घरेलू एपीआई उत्पादन को तेज करने की मांग को बढ़ा दिया है। जबकि अधिकारियों ने अभी तक सटीक प्रभाव आँकड़े नहीं बताए हैं, यह कमी उद्योग की बाहरी आपूर्ति झटकों के प्रति संवेदनशीलता को उजागर करती है।
हितधारक इस मुद्दे को बारीकी से देख रहे हैं, क्योंकि दीर्घकालिक कमी से दवाओं की उपलब्धता और निर्यात प्रतिबद्धताओं पर असर पड़ सकता है। उद्योग सरकार से नई एपीआई उत्पादन इकाइयों के तेज़ अनुमोदन की अपील कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी कमी से बचा जा सके।
विश्लेषकों का कहना है कि गुजरात, जो भारत के फार्मास्युटिकल उत्पादन का बड़ा हिस्सा रखता है, एपीआई के आयात पर बहुत निर्भर है। वैश्विक आपूर्ति में किसी भी व्यवधान का असर स्थानीय कारखानों पर तुरंत पड़ता है, जिससे कुछ कंपनियों को उत्पादन घटाने या वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता खोजने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
इस स्थिति ने अधिक स्टॉक बफ़र रखने और घरेलू एपीआई उत्पादन को तेज करने की मांग को बढ़ा दिया है। जबकि अधिकारियों ने अभी तक सटीक प्रभाव आँकड़े नहीं बताए हैं, यह कमी उद्योग की बाहरी आपूर्ति झटकों के प्रति संवेदनशीलता को उजागर करती है।
हितधारक इस मुद्दे को बारीकी से देख रहे हैं, क्योंकि दीर्घकालिक कमी से दवाओं की उपलब्धता और निर्यात प्रतिबद्धताओं पर असर पड़ सकता है। उद्योग सरकार से नई एपीआई उत्पादन इकाइयों के तेज़ अनुमोदन की अपील कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी कमी से बचा जा सके।