📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gauravyawalkar.2012
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एपी उच्च न्यायालय ने एसबीआई से 23 वर्ष पुरानी एनआरआई वंशानुक्रम रिहा करने का आदेश दिया
✍️ The Indian Express
🗓 10 सित. 2026, 01:37 PM
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आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य बैंक ऑफ इंडिया से 23 वर्ष से रोकी गई एनआरआई भाई की वंशानुक्रम रिहा करने का आदेश दिया।
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने आज एक निर्णय जारी किया, जिसमें राज्य बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को 23 वर्षों से रोकी गई वंशानुक्रम रिहा करने का निर्देश दिया गया।
यह वंशानुक्रम एक एनआरआई भाई की है, जिसे एक महिला ने न्यायालय में लाया था। एसबीआई ने दावे के तहत फंड को रोका हुआ था कि खाता एक दिवंगत रिश्तेदार से जुड़ा है, परन्तु न्यायालय ने पाया कि इस तरह के लंबे समय तक रोकने का कोई वैधानिक आधार नहीं है।
न्यायालय का निर्णय बैंक को वैधानिक समयसीमा के भीतर वंशानुक्रम जारी करने के महत्व को रेखांकित करता है और ऐसे मामलों के लिए एक मिसाल कायम करता है जहाँ बैंक ने लंबे समय तक फंड रोके रखे हैं।
एसबीआई से अपेक्षा की जाती है कि वह न्यायालय द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर आदेश का पालन करेगा, ताकि सही वारिसों को बिना किसी और देरी के संपत्ति मिल सके।
यह वंशानुक्रम एक एनआरआई भाई की है, जिसे एक महिला ने न्यायालय में लाया था। एसबीआई ने दावे के तहत फंड को रोका हुआ था कि खाता एक दिवंगत रिश्तेदार से जुड़ा है, परन्तु न्यायालय ने पाया कि इस तरह के लंबे समय तक रोकने का कोई वैधानिक आधार नहीं है।
न्यायालय का निर्णय बैंक को वैधानिक समयसीमा के भीतर वंशानुक्रम जारी करने के महत्व को रेखांकित करता है और ऐसे मामलों के लिए एक मिसाल कायम करता है जहाँ बैंक ने लंबे समय तक फंड रोके रखे हैं।
एसबीआई से अपेक्षा की जाती है कि वह न्यायालय द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर आदेश का पालन करेगा, ताकि सही वारिसों को बिना किसी और देरी के संपत्ति मिल सके।