📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sumeet Moghe
विज्ञान
अमर फाल्कन ने मणिपुर से सोमालिया तक किया रिकॉर्ड छह‑दिनों का प्रवास
✍️ ThePrint
🗓 08 नव. 2026, 04:16 PM
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अमर फाल्कन का झुंड केवल छह दिनों में भारत के मणिपुर से सोमालिया तक पहुंचा, जो रैप्टर प्रजातियों में सबसे लंबी प्रवास में से एक है।
अमर फाल्कन, एक छोटा रैप्टर, ने भारत के मणिपुर से अफ्रीका के सोमालिया तक का लंबा प्रवास केवल छह दिनों में पूरा किया। ऑर्थनोलॉजिस्टों ने बताया कि यह झुंड अक्टूबर के शुरुआती दिनों में मणिपुर से निकलकर बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और अंत में सोमालिया के जलाशयों तक पहुँचा, जहाँ वे शीतकाल बिताते हैं।
विज्ञानियों का मानना है कि इस तेज़ गति वाले प्रवास से इस प्रजाति की अद्भुत सहनशक्ति और दिशा‑निर्देशन क्षमता स्पष्ट होती है। उपग्रह टैगिंग और स्थल निरीक्षण से पता चलता है कि पक्षी लगभग 5,000 किलोमीटर की दूरी एक हफ्ते से भी कम समय में तय करते हैं, रास्ते में कीड़े‑मकोड़े खाकर और मौसमी हवाओं का उपयोग करके उड़ान भरते हैं।
यह प्रवास संरक्षण संगठनों का ध्यान आकर्षित कर रहा है, क्योंकि अमर फाल्कन को मार्ग के विभिन्न हिस्सों में आवास क्षरण और शिकार जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भारत और पूर्वी अफ्रीका दोनों में प्रमुख ठहराव बिंदुओं की सुरक्षा और स्थानीय समुदायों में इन पक्षियों के पारिस्थितिक महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के प्रयास चल रहे हैं।
इतिहास में मणिपुर को इस प्रजाति के वसंत‑समय के एकत्रीकरण स्थल के रूप में दर्ज किया गया है, जहाँ से वे दक्षिण की लंबी यात्रा शुरू करते हैं। शोधकर्ता आशा करते हैं कि निरंतर निगरानी से इस अद्भुत प्रवास के समय‑सारणी और मार्गों की गहरी समझ प्राप्त होगी।
विज्ञानियों का मानना है कि इस तेज़ गति वाले प्रवास से इस प्रजाति की अद्भुत सहनशक्ति और दिशा‑निर्देशन क्षमता स्पष्ट होती है। उपग्रह टैगिंग और स्थल निरीक्षण से पता चलता है कि पक्षी लगभग 5,000 किलोमीटर की दूरी एक हफ्ते से भी कम समय में तय करते हैं, रास्ते में कीड़े‑मकोड़े खाकर और मौसमी हवाओं का उपयोग करके उड़ान भरते हैं।
यह प्रवास संरक्षण संगठनों का ध्यान आकर्षित कर रहा है, क्योंकि अमर फाल्कन को मार्ग के विभिन्न हिस्सों में आवास क्षरण और शिकार जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भारत और पूर्वी अफ्रीका दोनों में प्रमुख ठहराव बिंदुओं की सुरक्षा और स्थानीय समुदायों में इन पक्षियों के पारिस्थितिक महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के प्रयास चल रहे हैं।
इतिहास में मणिपुर को इस प्रजाति के वसंत‑समय के एकत्रीकरण स्थल के रूप में दर्ज किया गया है, जहाँ से वे दक्षिण की लंबी यात्रा शुरू करते हैं। शोधकर्ता आशा करते हैं कि निरंतर निगरानी से इस अद्भुत प्रवास के समय‑सारणी और मार्गों की गहरी समझ प्राप्त होगी।