📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Saddam19
मौसम
बिहार में गंडक बराज के 36 गेट खुले, बाढ़ का खतरा बढ़ा
✍️ Amar Ujala · Patna
🗓 26 अग. 2026, 06:02 PM
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गंडक नदी में जलप्रवाह बढ़ने के कारण सभी 36 गेट खुले, तीन मीटर ऊँची बाढ़ की लहर का खतरा बढ़ा।
राज्य के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने गंडक बराज के सभी 36 गेट खोलने की घोषणा की है, क्योंकि नदी के जलप्रवाह में अचानक वृद्धि हुई है। जलस्तर में इस तेज़ उछाल से निचले इलाकों में बाढ़ की लहर तीन मीटर तक पहुँचने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
क्षेत्रीय मौसम केंद्र के आंकड़ों से पता चलता है कि बरसात के कारण जलस्रोत में जल की मात्रा बढ़ी है, जिससे गंडक का स्तर तेज़ी से बढ़ा है। बराज के गेट खोलने के बाद भी, बराज के नीचे के गाँवों के निवासियों को सतर्क रहने और जल स्तर बढ़ने पर निकासी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
स्थानीय पुलिस और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल को संभावित बचाव कार्यों के लिए तैनात किया गया है। पटना और आस‑पास के जिलों में विस्थापित परिवारों के लिये अस्थायी राहत शिविर तैयार किए जा रहे हैं, जबकि राज्य सरकार स्थिति पर करीबी नज़र रख रही है।
सभी गेट खोलना एक सावधानीपूर्ण कदम है, जिससे बराज के अनियंत्रित ओवरटॉपिंग को रोका जा सके और बाढ़ से कृषि क्षेत्र व बुनियादी ढाँचे को होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
नागरिकों को आधिकारिक सूचना स्रोतों से अपडेट लेते रहने और बाढ़‑ग्रस्त सड़कों या नदी किनारों को पार करने से बचने की चेतावनी दी गई है।
क्षेत्रीय मौसम केंद्र के आंकड़ों से पता चलता है कि बरसात के कारण जलस्रोत में जल की मात्रा बढ़ी है, जिससे गंडक का स्तर तेज़ी से बढ़ा है। बराज के गेट खोलने के बाद भी, बराज के नीचे के गाँवों के निवासियों को सतर्क रहने और जल स्तर बढ़ने पर निकासी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
स्थानीय पुलिस और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल को संभावित बचाव कार्यों के लिए तैनात किया गया है। पटना और आस‑पास के जिलों में विस्थापित परिवारों के लिये अस्थायी राहत शिविर तैयार किए जा रहे हैं, जबकि राज्य सरकार स्थिति पर करीबी नज़र रख रही है।
सभी गेट खोलना एक सावधानीपूर्ण कदम है, जिससे बराज के अनियंत्रित ओवरटॉपिंग को रोका जा सके और बाढ़ से कृषि क्षेत्र व बुनियादी ढाँचे को होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
नागरिकों को आधिकारिक सूचना स्रोतों से अपडेट लेते रहने और बाढ़‑ग्रस्त सड़कों या नदी किनारों को पार करने से बचने की चेतावनी दी गई है।