📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
राजनीति
अकाली दल ने भाजपा से तोड़ी गठबंधन, 117 सीटों पर अकेले चुनाव का एलान
✍️ Amar Ujala · Jalandhar
🗓 26 अग. 2026, 09:05 AM
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शिरोमणि अकाली दल ने 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया, भाजपा के साथ गठबंधन से इनकार किया और पार्टी कार्यकर्ताओं में असमंजस पैदा किया।
पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (सद) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच लंबे समय से चल रहे गठबंधन में अचानक बदलाव आया है। जालंधर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ सद नेता रंजीत सिंह ने बताया कि सद 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगा, जिससे आगामी विधानसभा चुनावों में गठबंधन समाप्त हो गया। उन्होंने कहा कि पार्टी अपनी स्वतंत्र पहचान को पुनः स्थापित करना चाहती है।
यह निर्णय राजनीतिक विश्लेषकों को आश्चर्यचकित कर रहा है, क्योंकि पिछले एक दशक से सद‑भाजपा गठबंधन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का मुख्य आधार रहा है। सद ने सीट‑वाटरिंग का विस्तृत विवरण नहीं दिया, पर कहा कि वह उन क्षेत्रों में चुनाव लड़ेगा जहाँ उसकी जमीनी ताकत मजबूत है। इस घोषणा से स्थानीय कार्यकर्ताओं में हलचल मच गई है, क्योंकि कई ने भाजपा के साथ मिलकर प्रचार‑प्रसार की तैयारी की थी।
पार्टी के कई कार्यकर्ता इस अचानक बदलाव को लेकर भ्रमित हैं। वरिष्ठ कार्यकर्ता महिंदर कौर ने बताया कि अब स्वयंसेवकों को यह नहीं पता कि किस क्षेत्र में काम करना है, और इस बात को लेकर चिंता है कि अलग‑अलग चुनावी रणनीति से विरोधी वोटों का बंटवारा हो सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सद का अकेला कदम पंजाब के चुनावी समीकरण को बदल सकता है, जिससे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों को फायदा मिल सकता है। भाजपा ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे चुनाव की तारीख नजदीक आने पर राज्य की राजनीतिक स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।
यह निर्णय राजनीतिक विश्लेषकों को आश्चर्यचकित कर रहा है, क्योंकि पिछले एक दशक से सद‑भाजपा गठबंधन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का मुख्य आधार रहा है। सद ने सीट‑वाटरिंग का विस्तृत विवरण नहीं दिया, पर कहा कि वह उन क्षेत्रों में चुनाव लड़ेगा जहाँ उसकी जमीनी ताकत मजबूत है। इस घोषणा से स्थानीय कार्यकर्ताओं में हलचल मच गई है, क्योंकि कई ने भाजपा के साथ मिलकर प्रचार‑प्रसार की तैयारी की थी।
पार्टी के कई कार्यकर्ता इस अचानक बदलाव को लेकर भ्रमित हैं। वरिष्ठ कार्यकर्ता महिंदर कौर ने बताया कि अब स्वयंसेवकों को यह नहीं पता कि किस क्षेत्र में काम करना है, और इस बात को लेकर चिंता है कि अलग‑अलग चुनावी रणनीति से विरोधी वोटों का बंटवारा हो सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सद का अकेला कदम पंजाब के चुनावी समीकरण को बदल सकता है, जिससे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों को फायदा मिल सकता है। भाजपा ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे चुनाव की तारीख नजदीक आने पर राज्य की राजनीतिक स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।