📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rashmi dangi
जीवनशैली
ऐपन कला को मिली वैश्विक पहचान, पायनियर एज ने कहा
✍️ Pioneer Edge
🗓 28 अग. 2026, 05:34 PM
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पायनियर एज ने बताया कि पारम्परिक ऐपन कला सीमाओं को तोड़ते हुए अंतरराष्ट्रीय मान्यता पा रही है।
उत्ताखंड के कुमाऊँ क्षेत्र की पारम्परिक ऐपन कला अब विश्व मंच पर चमक रही है, पायनियर एज की रिपोर्ट के अनुसार। यह जटिल डिज़ाइन, जो पहले त्यौहार और अनुष्ठानों में दीवारों व फर्श पर बनते थे, अब विदेशी गैलरियों और सांस्कृतिक महोत्सवों में प्रदर्शित हो रहे हैं, जिससे यह स्थानीय कला से वैश्विक मान्यता की ओर बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय कारीगरों और अंतरराष्ट्रीय क्यूरेटरों के सहयोग, साथ ही डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर इस कला की प्रस्तुति ने इसकी पहुँच को विस्तृत किया है। इस प्रवृत्ति से युवा कलाकारों को इस तकनीक को संरक्षित रखते हुए समकालीन विषयों के साथ प्रयोग करने का अवसर मिल रहा है, जिससे यह स्थानीय रीति‑रिवाज़ों से परे भी प्रासंगिक बन रहा है।
पायनियर एज ने बताया कि विदेशों में प्रामाणिक ऐपन कलाकृतियों की बढ़ती माँग से कारीगरों को नई आर्थिक संभावनाएँ मिल रही हैं। अब वे अपनी रचनाएँ ऑनलाइन मार्केटप्लेस और निर्यात चैनलों के माध्यम से बेच रहे हैं, जिससे यह कला विश्व स्तर पर भारतीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय कारीगरों और अंतरराष्ट्रीय क्यूरेटरों के सहयोग, साथ ही डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर इस कला की प्रस्तुति ने इसकी पहुँच को विस्तृत किया है। इस प्रवृत्ति से युवा कलाकारों को इस तकनीक को संरक्षित रखते हुए समकालीन विषयों के साथ प्रयोग करने का अवसर मिल रहा है, जिससे यह स्थानीय रीति‑रिवाज़ों से परे भी प्रासंगिक बन रहा है।
पायनियर एज ने बताया कि विदेशों में प्रामाणिक ऐपन कलाकृतियों की बढ़ती माँग से कारीगरों को नई आर्थिक संभावनाएँ मिल रही हैं। अब वे अपनी रचनाएँ ऑनलाइन मार्केटप्लेस और निर्यात चैनलों के माध्यम से बेच रहे हैं, जिससे यह कला विश्व स्तर पर भारतीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन सकती है।