📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Eugene Alvin Villar (seav)
बिज़नेस
एडीबी ने भारत में हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए $1 बिलियन के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए
✍️ The Economic Times
🗓 07 सित. 2026, 02:33 PM
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एशियन डेवलपमेंट बैंक ने भारत में अपना पहला ट्रांजैक्शन एडवाइज़री पैक्ट किया, जिससे हरित ऊर्जा पहलों के लिए लगभग $1 बिलियन जुटाने की योजना है।
एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने भारत में अपने पहले ट्रांजैक्शन एडवाइज़री पैक्ट पर हस्ताक्षर किए, जिससे देश में इस प्रकार का पहला समझौता स्थापित हुआ। यह पैक्ट नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए निजी और सार्वजनिक पूँजी को आकर्षित करने हेतु सलाहकार समर्थन प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है।
समझौते के तहत एडीबी लगभग $1 बिलियन की फाइनेंसिंग को हरित ऊर्जा पहलों के लिए जुटाने का लक्ष्य रखता है, जिसमें सौर, पवन ऊर्जा और उभरती हुई क्लीन‑टेक्नोलॉजी परियोजनाएँ शामिल होंगी। बैंक भारतीय वित्तीय संस्थानों, डेवलपर्स और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर ऐसे लेन‑देन तैयार करेगा जो निवेश जोखिम को कम करें और परियोजनाओं की व्यवहार्यता बढ़ाएँ।
यह पहल भारत के जलवायु लक्ष्य और अगले दशक में स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के प्रयासों के साथ मेल खाती है। एडीबी की विशेषज्ञता का उपयोग करके इस साझेदारी से फंड का प्रवाह तेज़ होने की उम्मीद है, जिससे रोजगार सृजन और कम‑कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर परिवर्तन को गति मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पैक्ट भविष्य में अन्य बहुपक्षीय ऋणदाताओं को समान सलाहकार ढाँचे अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है, जिससे सतत बुनियादी ढाँचे में निजी‑क्षेत्र के निवेश को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।
समझौते के तहत एडीबी लगभग $1 बिलियन की फाइनेंसिंग को हरित ऊर्जा पहलों के लिए जुटाने का लक्ष्य रखता है, जिसमें सौर, पवन ऊर्जा और उभरती हुई क्लीन‑टेक्नोलॉजी परियोजनाएँ शामिल होंगी। बैंक भारतीय वित्तीय संस्थानों, डेवलपर्स और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर ऐसे लेन‑देन तैयार करेगा जो निवेश जोखिम को कम करें और परियोजनाओं की व्यवहार्यता बढ़ाएँ।
यह पहल भारत के जलवायु लक्ष्य और अगले दशक में स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के प्रयासों के साथ मेल खाती है। एडीबी की विशेषज्ञता का उपयोग करके इस साझेदारी से फंड का प्रवाह तेज़ होने की उम्मीद है, जिससे रोजगार सृजन और कम‑कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर परिवर्तन को गति मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पैक्ट भविष्य में अन्य बहुपक्षीय ऋणदाताओं को समान सलाहकार ढाँचे अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है, जिससे सतत बुनियादी ढाँचे में निजी‑क्षेत्र के निवेश को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।