📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Information and Broadcasting
मनोरंजन
कुमार हासन ने एलोन मस्क को स्टारलिंक लाइसेंस पर किया जवाब, कहा भारत लोकतंत्र है, उपनिवेश नहीं
✍️ Sacnilk
🗓 10 अक्टू. 2026, 01:37 AM
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विनोद अभिनेता कुमार हासन ने स्टारलिंक लाइसेंस विवाद पर एलोन मस्क की बातों को कड़ा जवाब दिया, कहा भारत एक स्वतंत्र लोकतंत्र है, उपनिवेश नहीं।
विनोद तमिल सिनेमा स्टार कुमार हासन ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एलोन मस्क को स्टारलिंक ब्रॉडबैंड सेवा के लाइसेंस विवाद को लेकर टोक दिया। हासन ने भारत सरकार द्वारा स्पेसएक्स को लाइसेंस न देने के निर्णय को विदेशी कंपनियों के प्रति उपनिवेशी रवैये का हिस्सा कहा।
हासन ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएँ बाहरी दबाव के बिना स्वतंत्र नियामक निर्णय ले सकती हैं और देश को "उपनिवेश" कहकर संबोधित करना उसकी संप्रभुता को कमजोर करता है। उन्होंने भविष्य में ऐसी तकनीकी साझेदारियों के लिए खतरनाक मिसाल स्थापित होने की चेतावनी दी।
इन टिप्पणियों के बीच, स्पेसएक्स अपने लो‑अर्थ‑ऑर्बिट सैटेलाइट नेटवर्क को भारत में चलाने के लिए मंजूरी चाहता है, जो दूरदराज के क्षेत्रों में हाई‑स्पीड इंटरनेट लाने का वादा करता है। भारतीय अधिकारियों ने सुरक्षा और स्पेक्ट्रम से जुड़ी चिंताओं के कारण लाइसेंस प्रक्रिया को लंबा खींचा है, जिससे उद्योग विशेषज्ञों और राजनैतिक विश्लेषकों की आलोचना बढ़ी है।
हासन के बयान राजनीतिक स्वर में हैं, परन्तु यह कई भारतीय हितधारकों की चिंताओं को भी दर्शाते हैं कि बिना नियंत्रण के विदेशी तकनीकी कंपनियों का प्रवेश डेटा गोपनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। सरकार और स्पेसएक्स के बीच संभावित समझौते पर बातचीत जारी रहने की संभावना है।
हासन ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएँ बाहरी दबाव के बिना स्वतंत्र नियामक निर्णय ले सकती हैं और देश को "उपनिवेश" कहकर संबोधित करना उसकी संप्रभुता को कमजोर करता है। उन्होंने भविष्य में ऐसी तकनीकी साझेदारियों के लिए खतरनाक मिसाल स्थापित होने की चेतावनी दी।
इन टिप्पणियों के बीच, स्पेसएक्स अपने लो‑अर्थ‑ऑर्बिट सैटेलाइट नेटवर्क को भारत में चलाने के लिए मंजूरी चाहता है, जो दूरदराज के क्षेत्रों में हाई‑स्पीड इंटरनेट लाने का वादा करता है। भारतीय अधिकारियों ने सुरक्षा और स्पेक्ट्रम से जुड़ी चिंताओं के कारण लाइसेंस प्रक्रिया को लंबा खींचा है, जिससे उद्योग विशेषज्ञों और राजनैतिक विश्लेषकों की आलोचना बढ़ी है।
हासन के बयान राजनीतिक स्वर में हैं, परन्तु यह कई भारतीय हितधारकों की चिंताओं को भी दर्शाते हैं कि बिना नियंत्रण के विदेशी तकनीकी कंपनियों का प्रवेश डेटा गोपनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। सरकार और स्पेसएक्स के बीच संभावित समझौते पर बातचीत जारी रहने की संभावना है।