📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / LetsUpp Marathi on YouTube
राजनीति
अभिजीत दिपके ने विरोधकारियों को ‘कॉकरोच’ कहा, विराम की अपील और ‘सच्चे नेताओं’ का दावा
✍️ NDTV
🗓 21 अक्टू. 2026, 05:16 AM
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अभिजीत दिपके ने हालिया वीडियो में विरोधकारियों को “कॉकरोच” कहकर प्रदर्शन रोकने की अपील की और कहा कि सच्चा नेतृत्व कहीं और है।
अभिजीत दिपके, एक प्रमुख कार्यकर्ता, ने एक वीडियो में वर्तमान विरोधकारियों को “कॉकरोच” कहकर संबोधित किया। यह कठोर भाषा चल रहे प्रदर्शनों को वैधता से बाहर करने के उद्देश्य से इस्तेमाल की गई है, जो कई शहरों में सार्वजनिक ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
उसी संदेश में दिपके ने प्रदर्शनकारियों से अपने कार्यों को रोकने का आग्रह किया, यह तर्क देते हुए कि निरंतर उकसावन से तनाव बढ़ेगा और कोई ठोस परिणाम नहीं निकलेगा। उन्होंने शांति की आवश्यकता पर बल दिया और असंतोष व्यक्त करने के वैकल्पिक रास्तों का संकेत दिया।
कार्यकर्ता ने यह भी कहा कि “सच्चे नेता” वर्तमान विरोधकारियों में नहीं हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि वैध राजनीतिक अधिकार कहीं और स्थित है। अब तक विरोध समूहों या सरकारी प्रतिनिधियों की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया है, जिससे मिश्रित प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न हुई हैं। समर्थकों ने दिपके के बयान को व्यवस्था की पुकार माना, जबकि आलोचकों ने इसे विरोध को बदनाम करने के लिए उकसाने वाली भाषा बताया।
NDTV ने इस क्लिप की प्रामाणिकता की पुष्टि की है और बताया कि यह संदेश देश में हालिया प्रदर्शनों की वैधता और रणनीतियों पर चल रहे व्यापक बहस को दर्शाता है।
उसी संदेश में दिपके ने प्रदर्शनकारियों से अपने कार्यों को रोकने का आग्रह किया, यह तर्क देते हुए कि निरंतर उकसावन से तनाव बढ़ेगा और कोई ठोस परिणाम नहीं निकलेगा। उन्होंने शांति की आवश्यकता पर बल दिया और असंतोष व्यक्त करने के वैकल्पिक रास्तों का संकेत दिया।
कार्यकर्ता ने यह भी कहा कि “सच्चे नेता” वर्तमान विरोधकारियों में नहीं हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि वैध राजनीतिक अधिकार कहीं और स्थित है। अब तक विरोध समूहों या सरकारी प्रतिनिधियों की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया है, जिससे मिश्रित प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न हुई हैं। समर्थकों ने दिपके के बयान को व्यवस्था की पुकार माना, जबकि आलोचकों ने इसे विरोध को बदनाम करने के लिए उकसाने वाली भाषा बताया।
NDTV ने इस क्लिप की प्रामाणिकता की पुष्टि की है और बताया कि यह संदेश देश में हालिया प्रदर्शनों की वैधता और रणनीतियों पर चल रहे व्यापक बहस को दर्शाता है।