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आलीराजपुर में 'हौसलों की उड़ान' कार्यक्रम से 29 दिव्यांग बच्चों को मिलेगा शिक्षा व कल्याणकारी योजनाओं का लाभ
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आलीराजपुर में आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर ने दिव्यांग बच्चों से संवाद किया। पालकों को छात्रावास प्रवेश, प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया समझाई गई और दिव्यांग बालिकाओं के लिए पृथक छात्रावास खोलने का आश्वासन दिया गया।
सेवा संकल्प अभियान—‘सेवा में मेरा योगदान’ के अंतर्गत दिव्यांग बच्चों के सशक्तिकरण, शिक्षा से जोड़ने तथा उन्हें शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से शनिवार को जिला पंचायत आलीराजपुर में ‘हौसलों की उड़ान’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत श्रीमती संघमित्रा गौतम ने की। कार्यक्रम में कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर वर्चुअल माध्यम से शामिल हुईं और दिव्यांग बच्चों एवं उनके पालकों से संवाद कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं तथा अपेक्षाओं की जानकारी ली। कार्यक्रम में जिले के 29 दिव्यांग बच्चों ने अपने पालकों के साथ उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना, उनके समुचित विकास के लिए अनुकूल अवसर उपलब्ध कराना तथा उनके पालकों को शासन की विभिन्न योजनाओं एवं सुविधाओं के प्रति जागरूक करना रहा। इस दौरान संबंधित विभागों के अधिकारियों ने पालकों को दिव्यांग बच्चों के अधिकारों, शिक्षा, छात्रावास में प्रवेश और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न पेंशन एवं कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए पात्र हितग्राहियों को इनका लाभ लेने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया। पालकों को दिव्यांगता प्रमाण-पत्र तथा विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (यूडीआईडी कार्ड) बनवाने की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों और संबंधित कार्यालयों के बारे में भी बताया गया।
दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विद्यालयों एवं छात्रावासों में प्रवेश की प्रक्रिया तथा प्रवेश के बाद उपलब्ध होने वाली सुविधाओं के संबंध में भी मार्गदर्शन दिया गया। जिले में संचालित चंद्रशेखर आजाद दृष्टिबाधित बालक छात्रावास तथा निःशक्त छात्रावास, कुंड की सुविधाओं, प्रवेश प्रक्रिया और बच्चों को मिलने वाली सहायता के बारे में पालकों को विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत श्रीमती संघमित्रा गौतम ने पालकों से व्यक्तिगत रूप से चर्चा कर उनकी समस्याओं एवं अपेक्षाओं को सुना। उन्होंने पालकों को अपने बच्चों की शिक्षा और सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, बच्चों को छात्रावास में प्रवेश दिलाकर नियमित शिक्षा से जोड़ने का आह्वान किया, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और भविष्य में समाज की मुख्यधारा में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम के दौरान दिव्यांग बालिकाओं के पालकों ने जिले में दिव्यांग बालिकाओं के लिए पृथक छात्रावास प्रारंभ करने की मांग रखी। पालकों ने बताया कि बालिकाओं की शिक्षा एवं सुरक्षित आवासीय व्यवस्था उपलब्ध होने से उन्हें नियमित अध्ययन के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। इस पर श्रीमती संघमित्रा गौतम ने आवश्यक कार्यवाही करते हुए दिव्यांग बालिका छात्रावास प्रारंभ कराने का आश्वासन दिया। यह पहल दिव्यांग बालिकाओं को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर के निर्देशन में शीघ्र ही निःशक्त छात्रावास में विशेष शिविर आयोजित करने का निर्णय लिया गया। शिविर का उद्देश्य चिह्नित दिव्यांग बच्चों को शासन की पात्रतानुसार योजनाओं से जोड़ना तथा उनके आवश्यक दस्तावेजों से संबंधित समस्याओं का निराकरण एक ही स्थान पर सुनिश्चित करना है। शिविर में दिव्यांगता प्रमाण-पत्र, समग्र आईडी एवं आधार कार्ड बनवाने तथा इन दस्तावेजों में आवश्यक सुधार से संबंधित कार्यवाही की जाएगी। इससे दिव्यांग बच्चों एवं उनके पालकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी और योजनाओं का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान होगी।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना, उनके समुचित विकास के लिए अनुकूल अवसर उपलब्ध कराना तथा उनके पालकों को शासन की विभिन्न योजनाओं एवं सुविधाओं के प्रति जागरूक करना रहा। इस दौरान संबंधित विभागों के अधिकारियों ने पालकों को दिव्यांग बच्चों के अधिकारों, शिक्षा, छात्रावास में प्रवेश और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न पेंशन एवं कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए पात्र हितग्राहियों को इनका लाभ लेने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया। पालकों को दिव्यांगता प्रमाण-पत्र तथा विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (यूडीआईडी कार्ड) बनवाने की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों और संबंधित कार्यालयों के बारे में भी बताया गया।
दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विद्यालयों एवं छात्रावासों में प्रवेश की प्रक्रिया तथा प्रवेश के बाद उपलब्ध होने वाली सुविधाओं के संबंध में भी मार्गदर्शन दिया गया। जिले में संचालित चंद्रशेखर आजाद दृष्टिबाधित बालक छात्रावास तथा निःशक्त छात्रावास, कुंड की सुविधाओं, प्रवेश प्रक्रिया और बच्चों को मिलने वाली सहायता के बारे में पालकों को विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत श्रीमती संघमित्रा गौतम ने पालकों से व्यक्तिगत रूप से चर्चा कर उनकी समस्याओं एवं अपेक्षाओं को सुना। उन्होंने पालकों को अपने बच्चों की शिक्षा और सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, बच्चों को छात्रावास में प्रवेश दिलाकर नियमित शिक्षा से जोड़ने का आह्वान किया, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और भविष्य में समाज की मुख्यधारा में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम के दौरान दिव्यांग बालिकाओं के पालकों ने जिले में दिव्यांग बालिकाओं के लिए पृथक छात्रावास प्रारंभ करने की मांग रखी। पालकों ने बताया कि बालिकाओं की शिक्षा एवं सुरक्षित आवासीय व्यवस्था उपलब्ध होने से उन्हें नियमित अध्ययन के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। इस पर श्रीमती संघमित्रा गौतम ने आवश्यक कार्यवाही करते हुए दिव्यांग बालिका छात्रावास प्रारंभ कराने का आश्वासन दिया। यह पहल दिव्यांग बालिकाओं को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर के निर्देशन में शीघ्र ही निःशक्त छात्रावास में विशेष शिविर आयोजित करने का निर्णय लिया गया। शिविर का उद्देश्य चिह्नित दिव्यांग बच्चों को शासन की पात्रतानुसार योजनाओं से जोड़ना तथा उनके आवश्यक दस्तावेजों से संबंधित समस्याओं का निराकरण एक ही स्थान पर सुनिश्चित करना है। शिविर में दिव्यांगता प्रमाण-पत्र, समग्र आईडी एवं आधार कार्ड बनवाने तथा इन दस्तावेजों में आवश्यक सुधार से संबंधित कार्यवाही की जाएगी। इससे दिव्यांग बच्चों एवं उनके पालकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी और योजनाओं का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान होगी।