📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Jean Reutlinger
बिज़नेस
एए-सक्षम लेंडिंग ने भारत में समावेशी क्रेडिट वृद्धि को तेज किया, रिपोर्ट में कहा
✍️ Asianet Newsable
🗓 18 अक्टू. 2026, 02:16 PM
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एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि एए-सक्षम लेंडिंग प्लेटफ़ॉर्म ने कम पहुँच वाले उधारकर्ताओं को क्रेडिट प्रदान कर भारत में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है।
एशियननेट न्यूज़ेबल द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट ने एए-सक्षम लेंडिंग समाधानों के कारण भारत में समावेशी क्रेडिट वृद्धि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी को उजागर किया है। रिपोर्ट बताती है कि उन्नत एल्गोरिदमिक मूल्यांकन उपकरणों ने उन वर्गों को ऋण प्रदान करना संभव बना दिया है, जिन्हें पारंपरिक वित्तीय संस्थानों ने अक्सर बाहर रखा था।
एए-सक्षम लेंडिंग कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विश्लेषण का उपयोग करके उधारकर्ता की क्रेडिट योग्यता को पारम्परिक मानकों से परे आंकता है। यूटिलिटी बिल भुगतान, मोबाइल उपयोग पैटर्न और लेनदेन इतिहास जैसे वैकल्पिक डेटा को शामिल करके ये प्लेटफ़ॉर्म तेज़ी से और कम डिफ़ॉल्ट जोखिम के साथ ऋण स्वीकृति प्रदान करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस तकनीक को अपनाने से छोटे व्यवसायों, ग्रामीण उद्यमियों और पहली बार उधार लेने वालों को मिलने वाले ऋण में स्पष्ट विस्तार हुआ है। यद्यपि सटीक आँकड़े नहीं दिए गए, यह प्रवृत्ति एक अधिक लोकतांत्रिक क्रेडिट इकोसिस्टम की ओर बदलाव को दर्शाती है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह गति भारत के वित्तीय परिदृश्य को पुनः आकार दे सकती है, जिससे पारंपरिक बैंकों को भी समान एआई-आधारित मॉडल अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। नियामक भी इस विकास को नज़र में रख रहे हैं, ताकि नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
रिपोर्ट का निष्कर्ष यह है कि एए-सक्षम लेंडिंग भारत के वित्तीय समावेशन लक्ष्यों को हासिल करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जिससे लाखों भारतीयों के लिए क्रेडिट अंतर को पाटने का स्केलेबल रास्ता खुलता है।
एए-सक्षम लेंडिंग कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विश्लेषण का उपयोग करके उधारकर्ता की क्रेडिट योग्यता को पारम्परिक मानकों से परे आंकता है। यूटिलिटी बिल भुगतान, मोबाइल उपयोग पैटर्न और लेनदेन इतिहास जैसे वैकल्पिक डेटा को शामिल करके ये प्लेटफ़ॉर्म तेज़ी से और कम डिफ़ॉल्ट जोखिम के साथ ऋण स्वीकृति प्रदान करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस तकनीक को अपनाने से छोटे व्यवसायों, ग्रामीण उद्यमियों और पहली बार उधार लेने वालों को मिलने वाले ऋण में स्पष्ट विस्तार हुआ है। यद्यपि सटीक आँकड़े नहीं दिए गए, यह प्रवृत्ति एक अधिक लोकतांत्रिक क्रेडिट इकोसिस्टम की ओर बदलाव को दर्शाती है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह गति भारत के वित्तीय परिदृश्य को पुनः आकार दे सकती है, जिससे पारंपरिक बैंकों को भी समान एआई-आधारित मॉडल अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। नियामक भी इस विकास को नज़र में रख रहे हैं, ताकि नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
रिपोर्ट का निष्कर्ष यह है कि एए-सक्षम लेंडिंग भारत के वित्तीय समावेशन लक्ष्यों को हासिल करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जिससे लाखों भारतीयों के लिए क्रेडिट अंतर को पाटने का स्केलेबल रास्ता खुलता है।