📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vikramdeep Sidhu from Jhajjar, India
अपराध
हरियाणा के 8 साल के लड़के को लड़की पर हमले के बाद जमानत, बाल न्याय अधिनियम लागू
✍️ India Today
🗓 06 नव. 2026, 01:17 AM
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हरियाणा के 8 साल के लड़के ने लड़की पर हमला किया, उसे बाल न्याय अधिनियम की धारा के तहत जमानत दी गई।
हरियाणा के एक आठ साल के बच्चे पर लड़की पर हमला करने का आरोप लगा और उसे स्थानीय अदालत ने जमानत दे दी। इस मामले ने बच्चे की उम्र और आरोप की गंभीरता के कारण व्यापक चर्चा को जन्म दिया।
बाल न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम के तहत सात से बारह वर्ष के बीच के बच्चों को नाबालिग माना जाता है और यदि न्यायालय को भरोसा हो कि बच्चा साक्ष्य या गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा तो उसे जमानत दी जा सकती है। न्यायाधीश ने इन प्रावधानों को लागू किया, यह मानते हुए कि गंभीर अपराध होने के बावजूद नाबालिग को स्वचालित रूप से जमानत से वंचित नहीं किया जा सकता।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह अधिनियम जवाबदेही और पुनर्वास के बीच संतुलन बनाता है। जमानत का निर्णय बच्चे के अधिकारों की सुरक्षा और जांच के जारी रहने के बीच के संतुलन को दर्शाता है।
यह घटना इस बात पर प्रकाश डालती है कि अत्यंत छोटे बच्चों द्वारा किए गए हिंसक अपराधों को नाबालिग न्याय प्रणाली कैसे संभालती है, और क्या मौजूदा सुरक्षा उपाय पीड़ित की सुरक्षा और पुनर्वास के लक्ष्यों को पर्याप्त रूप से पूरा कर रहे हैं।
बाल न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम के तहत सात से बारह वर्ष के बीच के बच्चों को नाबालिग माना जाता है और यदि न्यायालय को भरोसा हो कि बच्चा साक्ष्य या गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा तो उसे जमानत दी जा सकती है। न्यायाधीश ने इन प्रावधानों को लागू किया, यह मानते हुए कि गंभीर अपराध होने के बावजूद नाबालिग को स्वचालित रूप से जमानत से वंचित नहीं किया जा सकता।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह अधिनियम जवाबदेही और पुनर्वास के बीच संतुलन बनाता है। जमानत का निर्णय बच्चे के अधिकारों की सुरक्षा और जांच के जारी रहने के बीच के संतुलन को दर्शाता है।
यह घटना इस बात पर प्रकाश डालती है कि अत्यंत छोटे बच्चों द्वारा किए गए हिंसक अपराधों को नाबालिग न्याय प्रणाली कैसे संभालती है, और क्या मौजूदा सुरक्षा उपाय पीड़ित की सुरक्षा और पुनर्वास के लक्ष्यों को पर्याप्त रूप से पूरा कर रहे हैं।