📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Amit Machamasi
धर्म
बखरी के 600 साल पुराने दुर्गा मंदिर की परमार वंश और तंत्र परम्पराओं का इतिहास
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 11 अक्टू. 2026, 03:01 PM
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बखरी, बेगूसराय के इस प्राचीन दुर्गा मंदिर को परमार वंश के राजाओं द्वारा स्थापित माना जाता है और यह 600 साल पुरानी धार्मिक परम्पराओं व तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध है।
बिहार के बेगूसराय जिले के बखरी गाँव में स्थित दुर्गा मंदिर लगभग छह शताब्दी पुराना माना जाता है। इस मंदिर की पहचान 600 साल पुरानी पूजा‑परम्पराओं, स्थानीय लोककथाओं और तंत्र साधना की प्रथा से जुड़ी है, जो आज भी भक्तों को आकर्षित करती है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना परमार वंश के राजाओं ने करवाई थी। परमार राजवंश, जो प्रारम्भिक मध्यकाल में इस क्षेत्र में प्रमुख था, शैव और शाक्त पूजा दोनों का समर्थन करता था, जिससे यह मंदिर उनके धार्मिक संरक्षण का प्रतीक बन गया।
समय के साथ, यहाँ "56 भोग" की परम्परा और तंत्र साधना जैसी विशिष्ट प्रथाएँ विकसित हुईं, जिन्हें आध्यात्मिक लाभ प्रदान करने वाला माना जाता है। इन अनुष्ठानों के विवरण गुप्त रखे जाते हैं, परन्तु नववर्ष के दौरान आयोजित नवरात्रि उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पवित्र स्थल की ओर आकर्षित होते हैं।
इतिहासकारों का कहना है कि इस मंदिर की वास्तुशिल्प शैली और अनुष्ठान कैलेंडर मुख्यधारा के हिंदू धर्म और स्थानीय लोकसंस्कृति के मिश्रण को दर्शाते हैं, जिससे यह बिहार की समृद्ध धार्मिक विविधता का जीवंत उदाहरण बनता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना परमार वंश के राजाओं ने करवाई थी। परमार राजवंश, जो प्रारम्भिक मध्यकाल में इस क्षेत्र में प्रमुख था, शैव और शाक्त पूजा दोनों का समर्थन करता था, जिससे यह मंदिर उनके धार्मिक संरक्षण का प्रतीक बन गया।
समय के साथ, यहाँ "56 भोग" की परम्परा और तंत्र साधना जैसी विशिष्ट प्रथाएँ विकसित हुईं, जिन्हें आध्यात्मिक लाभ प्रदान करने वाला माना जाता है। इन अनुष्ठानों के विवरण गुप्त रखे जाते हैं, परन्तु नववर्ष के दौरान आयोजित नवरात्रि उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पवित्र स्थल की ओर आकर्षित होते हैं।
इतिहासकारों का कहना है कि इस मंदिर की वास्तुशिल्प शैली और अनुष्ठान कैलेंडर मुख्यधारा के हिंदू धर्म और स्थानीय लोकसंस्कृति के मिश्रण को दर्शाते हैं, जिससे यह बिहार की समृद्ध धार्मिक विविधता का जीवंत उदाहरण बनता है।