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57 सालों से आस्था का केंद्र बना द्वालख का मां दुर्गा मंदिर, नवरात्रि में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
मधेपुर प्रखंड के कोसी दियारा इलाके के द्वालख गांव में मां वैष्णवी दुर्गा मंदिर इन दिनों आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। नवरात्रि के मौके पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
बताया जाता है कि इस मंदिर में पिछले 57 वर्षों से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जा रही है। नवरात्रि के दौरान आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां के दर्शन और पूजा-अर्चना करते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर को लेकर वर्षों से लोगों में गहरी आस्था है। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत यहां पूरी होती है, जिसके चलते हर साल नवरात्रि के दौरान भक्तों की संख्या बढ़ती जाती है।
मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के साथ भक्ति का माहौल बना हुआ है। महिलाएं और पुरुष श्रद्धालु मां के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में विशेष आयोजन और धार्मिक गतिविधियों के कारण पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आ रहा है।
57 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों की आस्था और विश्वास को मजबूती दे रही है। द्वालख का यह मां दुर्गा मंदिर स्थानीय लोगों के लिए सिर्फ पूजा का स्थान ही नहीं, बल्कि उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र भी बन चुका है।
बताया जाता है कि इस मंदिर में पिछले 57 वर्षों से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जा रही है। नवरात्रि के दौरान आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां के दर्शन और पूजा-अर्चना करते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर को लेकर वर्षों से लोगों में गहरी आस्था है। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत यहां पूरी होती है, जिसके चलते हर साल नवरात्रि के दौरान भक्तों की संख्या बढ़ती जाती है।
मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के साथ भक्ति का माहौल बना हुआ है। महिलाएं और पुरुष श्रद्धालु मां के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में विशेष आयोजन और धार्मिक गतिविधियों के कारण पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आ रहा है।
57 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों की आस्था और विश्वास को मजबूती दे रही है। द्वालख का यह मां दुर्गा मंदिर स्थानीय लोगों के लिए सिर्फ पूजा का स्थान ही नहीं, बल्कि उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र भी बन चुका है।