📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Immanuel Giel
विदेश
नई दिल्ली में 4था इंडो‑जर्मन पर्यावरण मंच शुरू
✍️ News On AIR
🗓 01 सित. 2026, 03:33 PM
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इंडो‑जर्मन पर्यावरण मंच का चौथा संस्करण आज नई दिल्ली में शुरू हुआ, जहाँ दोनों देशों के अधिकारी और विशेषज्ञ जलवायु व स्थिरता मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
नई दिल्ली में आज इंडो‑जर्मन पर्यावरण मंच का चौथा संस्करण आयोजित हुआ, जो पर्यावरणीय चुनौतियों पर द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत और जर्मनी के प्रतिनिधियों ने राजधानी में एक स्थान पर मिलकर जलवायु कार्रवाई, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत विकास पर अपने विचार साझा किए।
यह मंच नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों और उद्योग के प्रतिनिधियों को सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और संयुक्त पहल की संभावनाओं पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करता है। जबकि अभी तक विस्तृत परिणाम नहीं बताए गए हैं, प्रतिभागियों ने कचरा प्रबंधन, वायु गुणवत्ता और हरित प्रौद्योगिकी हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में सहयोगी परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करने की आशा जताई है।
आयोजकों ने पेरिस समझौते और भारत के अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में निरंतर संवाद के महत्व पर बल दिया। यह कार्यक्रम एक दिन तक चलने के बाद एक संयुक्त बयान जारी करेगा, जिसमें चर्चाओं का सारांश होगा।
यह सभा भारत‑जर्मनी के बीच पर्यावरणीय क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित करती है, जो कम‑कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर परिवर्तन को प्राथमिकता देती है।
दोनों देशों के हितधारक उम्मीद करते हैं कि यह मंच भविष्य के सहयोग, शोध साझेदारी और क्षमता‑निर्माण कार्यक्रमों के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।
यह मंच नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों और उद्योग के प्रतिनिधियों को सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और संयुक्त पहल की संभावनाओं पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करता है। जबकि अभी तक विस्तृत परिणाम नहीं बताए गए हैं, प्रतिभागियों ने कचरा प्रबंधन, वायु गुणवत्ता और हरित प्रौद्योगिकी हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में सहयोगी परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करने की आशा जताई है।
आयोजकों ने पेरिस समझौते और भारत के अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में निरंतर संवाद के महत्व पर बल दिया। यह कार्यक्रम एक दिन तक चलने के बाद एक संयुक्त बयान जारी करेगा, जिसमें चर्चाओं का सारांश होगा।
यह सभा भारत‑जर्मनी के बीच पर्यावरणीय क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित करती है, जो कम‑कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर परिवर्तन को प्राथमिकता देती है।
दोनों देशों के हितधारक उम्मीद करते हैं कि यह मंच भविष्य के सहयोग, शोध साझेदारी और क्षमता‑निर्माण कार्यक्रमों के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।