📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Jpdfive
बिज़नेस
CBRE के अनुसार 2028 तक 40% भारतीय ऑफिस किरायेदारों को क्वालिटी स्पेस की चिंता
✍️ Asianet Newsable
🗓 23 अग. 2026, 12:36 AM
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CBRE के सर्वे में पता चला कि 40% भारतीय ऑफिस किरायेदार 2028 तक क्वालिटी स्पेस पाने को लेकर चिंतित हैं।
वैश्विक रियल एस्टेट सेवा कंपनी CBRE के एक हालिया सर्वेक्षण में पता चला है कि भारत में 40% ऑफिस किरायेदार 2028 तक क्वालिटी ऑफिस स्पेस की उपलब्धता को लेकर चिंतित हैं। विभिन्न क्षेत्रों के कॉरपोरेट किरायेदारों ने डिज़ाइन मानकों, बुनियादी ढाँचे की विश्वसनीयता और बदलती कार्यस्थल अपेक्षाओं को पूरा करने की क्षमता को प्रमुख मुद्दे बताया।
यह परिणाम दर्शाता है कि प्रीमियम और लचीले कार्यस्थलों की मांग और वर्तमान आपूर्ति में अंतर बढ़ रहा है। कंपनियां अब लीज़ रणनीति पर पुनर्विचार कर रही हैं और आधुनिक सुविधाओं, मजबूत कनेक्टिविटी और सतत् विशेषताओं वाले स्पेस को प्राथमिकता दे रही हैं।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रवृत्ति से डेवलपर्स को उच्च‑ग्रेड प्रोजेक्ट्स को तेज़ी से डिलीवर करने और मौजूदा संपत्तियों को अपग्रेड करने का दबाव बढ़ेगा। यदि यह रुझान जारी रहा, तो यह अगले कुछ वर्षों में भारतीय वाणिज्यिक रियल एस्टेट बाजार में लीज़िंग गतिविधियों और निवेश निर्णयों को आकार देगा।
CBRE ने सर्वेक्षण में भाग लेने वाले कुल उत्तरदाताओं की संख्या नहीं बताई, पर यह कहा कि यह भावना भारतीय कंपनियों के लिए ऑफिस क्वालिटी को अब केवल लागत के बजाय रणनीतिक संपत्ति मानने के व्यापक बदलाव को दर्शाती है।
यह परिणाम दर्शाता है कि प्रीमियम और लचीले कार्यस्थलों की मांग और वर्तमान आपूर्ति में अंतर बढ़ रहा है। कंपनियां अब लीज़ रणनीति पर पुनर्विचार कर रही हैं और आधुनिक सुविधाओं, मजबूत कनेक्टिविटी और सतत् विशेषताओं वाले स्पेस को प्राथमिकता दे रही हैं।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रवृत्ति से डेवलपर्स को उच्च‑ग्रेड प्रोजेक्ट्स को तेज़ी से डिलीवर करने और मौजूदा संपत्तियों को अपग्रेड करने का दबाव बढ़ेगा। यदि यह रुझान जारी रहा, तो यह अगले कुछ वर्षों में भारतीय वाणिज्यिक रियल एस्टेट बाजार में लीज़िंग गतिविधियों और निवेश निर्णयों को आकार देगा।
CBRE ने सर्वेक्षण में भाग लेने वाले कुल उत्तरदाताओं की संख्या नहीं बताई, पर यह कहा कि यह भावना भारतीय कंपनियों के लिए ऑफिस क्वालिटी को अब केवल लागत के बजाय रणनीतिक संपत्ति मानने के व्यापक बदलाव को दर्शाती है।