📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Yann Forget
स्वास्थ्य
मध्य प्रदेश में 2025‑26 में 391 लोग बिजली से मार गए, पिछले साल से 26% बढ़ोतरी
✍️ The Times of India
🗓 30 सित. 2026, 03:02 AM
👁 16
द टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, 2025‑26 वित्तीय वर्ष में मध्य प्रदेश में 391 लोगों की बिजली से मौत हुई, जो पिछले साल की तुलना में 26% अधिक है।
मध्य प्रदेश में 2025‑26 वित्तीय वर्ष में 391 लोगों की बिजली से मौत दर्ज की गई, जैसा कि द टाइम्स ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट किया है। यह संख्या पिछले वर्ष 2024‑25 की तुलना में 26% अधिक है, जिससे राज्य में विद्युत सुरक्षा संबंधी घटनाओं में वृद्धि का संकेत मिलता है।
इस बढ़ोतरी ने राज्य प्राधिकरणों का ध्यान आकर्षित किया है, जो उच्च वोल्टेज बुनियादी ढाँचे और घरों की वायरिंग के मौजूदा सुरक्षा मानकों की पुनः समीक्षा कर सकते हैं। जबकि रिपोर्ट प्रत्येक मामले की विस्तृत जानकारी नहीं देती, कुल मिलाकर वृद्धि दर्शाती है कि सार्वजनिक जागरूकता और विद्युत मानकों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता है।
विशेषज्ञ आमतौर पर ऐसी वृद्धि को पुरानी बिजली लाइनों, अवैध कनेक्शन और शहरी‑ग्रामीण क्षेत्रों में अपर्याप्त सुरक्षा उपायों से जोड़ते हैं। राज्य सरकार आगे की मौतों को रोकने के लिए लक्षित जागरूकता अभियानों और निरीक्षणों की योजना बना सकती है।
रिपोर्ट में मृत्यु के कारणों का कोई विस्तृत जनसांख्यिकीय या क्षेत्रीय विभाजन नहीं दिया गया, इसलिए विश्लेषकों को विद्युत विभाग से अधिक विस्तृत डेटा की प्रतीक्षा करनी पड़ेगी।
इन आँकड़ों का स्रोत केवल द टाइम्स ऑफ इंडिया है, और स्थिति पर राज्य की प्रतिक्रिया के साथ आगे की जानकारी मिलने की संभावना है।
इस बढ़ोतरी ने राज्य प्राधिकरणों का ध्यान आकर्षित किया है, जो उच्च वोल्टेज बुनियादी ढाँचे और घरों की वायरिंग के मौजूदा सुरक्षा मानकों की पुनः समीक्षा कर सकते हैं। जबकि रिपोर्ट प्रत्येक मामले की विस्तृत जानकारी नहीं देती, कुल मिलाकर वृद्धि दर्शाती है कि सार्वजनिक जागरूकता और विद्युत मानकों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता है।
विशेषज्ञ आमतौर पर ऐसी वृद्धि को पुरानी बिजली लाइनों, अवैध कनेक्शन और शहरी‑ग्रामीण क्षेत्रों में अपर्याप्त सुरक्षा उपायों से जोड़ते हैं। राज्य सरकार आगे की मौतों को रोकने के लिए लक्षित जागरूकता अभियानों और निरीक्षणों की योजना बना सकती है।
रिपोर्ट में मृत्यु के कारणों का कोई विस्तृत जनसांख्यिकीय या क्षेत्रीय विभाजन नहीं दिया गया, इसलिए विश्लेषकों को विद्युत विभाग से अधिक विस्तृत डेटा की प्रतीक्षा करनी पड़ेगी।
इन आँकड़ों का स्रोत केवल द टाइम्स ऑफ इंडिया है, और स्थिति पर राज्य की प्रतिक्रिया के साथ आगे की जानकारी मिलने की संभावना है।