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28 अक्टू. 2026•
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शिक्षा

23वें अखिल कर्नाटक हस्तप्रति सम्मेलन का समापन बिदर में हुआ

✍️ रिपोर्टर: Basavaraj pujari 🗓 28 अक्टू. 2026, 06:14 PM 👁 19
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बिदर में आयोजित 23वें अखिल कर्नाटक हस्तप्रति सम्मेलन का समापन समारोह संपन्न हुआ, जहाँ वरिष्ठ विद्वान डॉ. वीरेनंद दांडे ने हस्तप्रति को राष्ट्रीय ज्ञान संपदा कहा।

बिदर में दो दिन चलने वाले 23वें अखिल कर्नाटक हस्तप्रति सम्मेलन का समापन समारोह आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्राचीन कन्नड़ साहित्य, शासनों और हस्तलिखित प्रतियों के अध्ययन व संरक्षण पर प्रकाश डालना था। हंपी कन्नड़ विश्वविद्यालय के हस्तप्रति विभाग और विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से यह सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

सम्मेलन के समापन में वरिष्ठ विद्वान डॉ. वीरेनंद दांडे ने हस्तप्रति को देश की ज्ञान संपदा मानते हुए उनका अध्ययन और संरक्षण राष्ट्रीय कर्तव्य बताया। उन्होंने इन प्रतियों के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया और भविष्य की पीढ़ी को इस दिशा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

बी.जी. शेटकर और डॉ. एन.ए. गीताचार्य ने हस्तप्रति संग्रहण और अध्ययन के महत्व पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को इन प्राचीन ग्रंथों के अध्ययन में संलग्न होने के लिए उत्साहित किया, जिससे सांस्कृतिक विरासत का निरंतर संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

डॉ. वीरेश बडिगेर, प्राचार्य सोमनाथ बिरादर और डॉ. महानंद मडकी सहित कई विद्वानों ने सम्मेलन में भाग लेकर सफलता में योगदान दिया और सभी आयोजकों तथा सहभागियों को धन्यवाद दिया।

हस्तप्रति प्रदर्शनी ने शोधकर्ताओं, साहित्य प्रेमियों और छात्रों का विशेष ध्यान आकर्षित किया, जिससे विभिन्न शास्त्रों की गहरी समझ और सांस्कृतिक जागरूकता में वृद्धि हुई।
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