📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
बिज़नेस
1991: भारत के ऐतिहासिक आर्थिक सुधार और उनके पीछे के वास्तुकार
✍️ NDTV
🗓 25 जुल. 2026, 04:49 AM
👁 4
1991 में भारत ने व्यापक आर्थिक सुधार शुरू किए, जिन्होंने उसके बाज़ार को नया रूप दिया, जिनका नेतृत्व वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री पी.वी. नारायणमहा के तहत किया।
1991 में भारत को गंभीर भुगतान संतुलन संकट का सामना करना पड़ा, विदेशी भंडार $1.5 बिलियन से नीचे गिर गया और बाहरी ऋण पर डिफ़ॉल्ट का खतरा बढ़ गया।
प्रधानमंत्री पी.वी. नारायणमहा के नेतृत्व में सरकार ने अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री नियुक्त किया। सिंह ने विदेशी निवेश को खोलने, आयात शुल्क घटाने, रुपये का अवमूल्यन करने और प्रमुख क्षेत्रों को विनियमित करने वाली योजना तैयार की।
जुलाई 1991 में घोषित इन सुधारों ने लाइसेंस‑आधारित व्यवस्था से बाज़ार‑उन्मुख ढाँचे की ओर बदलाव किया, जिससे भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की नींव पड़ी।
इन नीतिगत बदलावों को समर्थन और आलोचना दोनों मिली, परंतु इन्हें भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में समेकित करने वाला मोड़ माना जाता है।
प्रधानमंत्री पी.वी. नारायणमहा के नेतृत्व में सरकार ने अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री नियुक्त किया। सिंह ने विदेशी निवेश को खोलने, आयात शुल्क घटाने, रुपये का अवमूल्यन करने और प्रमुख क्षेत्रों को विनियमित करने वाली योजना तैयार की।
जुलाई 1991 में घोषित इन सुधारों ने लाइसेंस‑आधारित व्यवस्था से बाज़ार‑उन्मुख ढाँचे की ओर बदलाव किया, जिससे भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की नींव पड़ी।
इन नीतिगत बदलावों को समर्थन और आलोचना दोनों मिली, परंतु इन्हें भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में समेकित करने वाला मोड़ माना जाता है।