📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Itsmalay~commonswiki
धर्म
सागर के एरण में 1700 साल पुराना शिलापट्ट मिला, दर्शाता बलराम जन्म
✍️ Amar Ujala · Sagar
🗓 03 सित. 2026, 10:32 AM
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सागर जिले के एरण स्थल पर 5वीं‑6वीं शताब्दी का दुर्लभ शिलापट्ट मिला, जिसमें तीन दृश्यों में भगवान बलराम के जन्म और गर्भ‑प्रत्यारोपण कथा दर्शाई गई है।
मध्य प्रदेश के सागर जिले के एरण स्थल पर काम कर रहे पुरातत्वविदों ने लगभग 1,700 साल पुराना शिलापट्ट खोजा, जो गुप्तकालीन (5वीं‑6वीं शताब्दी) का माना जा रहा है। इस शिलापट्ट पर तीन अलग‑अलग दृश्यों में भगवान बलराम के जन्म तथा गर्भ‑प्रत्यारोपण की पौराणिक कथा को उकेरा गया है।
एरण को पहले से ही शिलालेखों और मंदिर अवशेषों के कारण महत्व दिया जाता है, और यह खोज इस स्थल के शहरी नियोजन एवं धार्मिक कला के अध्ययन में नई दिशा देती है। शिलापट्ट की कलात्मक शैली और पत्थर की नक्काशी से उस समय की पूजा‑पद्धति और चित्रात्मक परम्पराओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।
भारत पुरातत्व सर्वेक्षण के विशेषज्ञों ने इस शिलापट्ट का विस्तृत दस्तावेजीकरण शुरू कर दिया है और इसे क्षेत्रीय संग्रहालय में प्रदर्शित करने की योजना बना रहे हैं, जिससे मध्य भारत के प्रारम्भिक मध्यकालीन धार्मिक अभिव्यक्तियों को समझने में मदद मिलेगी।
यह खोज मध्य प्रदेश की समृद्ध पुरातात्विक विरासत को उजागर करती है और एरण जैसे कम ज्ञात स्थलों पर निरंतर शोध के महत्व को रेखांकित करती है।
एरण को पहले से ही शिलालेखों और मंदिर अवशेषों के कारण महत्व दिया जाता है, और यह खोज इस स्थल के शहरी नियोजन एवं धार्मिक कला के अध्ययन में नई दिशा देती है। शिलापट्ट की कलात्मक शैली और पत्थर की नक्काशी से उस समय की पूजा‑पद्धति और चित्रात्मक परम्पराओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।
भारत पुरातत्व सर्वेक्षण के विशेषज्ञों ने इस शिलापट्ट का विस्तृत दस्तावेजीकरण शुरू कर दिया है और इसे क्षेत्रीय संग्रहालय में प्रदर्शित करने की योजना बना रहे हैं, जिससे मध्य भारत के प्रारम्भिक मध्यकालीन धार्मिक अभिव्यक्तियों को समझने में मदद मिलेगी।
यह खोज मध्य प्रदेश की समृद्ध पुरातात्विक विरासत को उजागर करती है और एरण जैसे कम ज्ञात स्थलों पर निरंतर शोध के महत्व को रेखांकित करती है।