📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / tamingtheaibeast.org
अपराध
गोवा के क्राइम ब्रांच ऑफिस में 16 साल की लड़की के यौन शोषण का मामला, पुलिस अधिकारी को हिरासत
✍️ India.com
🗓 01 नव. 2026, 06:10 AM
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16 साल की लड़की ने गोवा के क्राइम ब्रांच कार्यालय में कई बार यौन शोषण की शिकायत की है, जिससे आरोपी पुलिस अधिकारी को हिरासत में ले लिया गया है।
गोवा पुलिस के क्राइम ब्रांच कार्यालय में 16‑साल की एक लड़की ने कई बार यौन शोषण की शिकायत की है। वह दावा करती है कि यह अत्याचार विभाग के परिसर में ही हुआ।
शिकायत के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले को दर्ज किया और आरोपी अधिकारी को हिरासत में ले लिया। अब जांच एजेंटों द्वारा पीड़िता और संभावित गवाहों से बयान एकत्र किए जा रहे हैं।
गोवा पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि मामला सक्रिय रूप से जांच में है और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। अधिकारी की पहचान या कार्यालय के सटीक स्थान को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस अधिकारी द्वारा किया गया कोई भी यौन शोषण भारतीय दंड संहिता और बाल यौन शोषण रोकथाम अधिनियम (POCSO) के तहत कड़ी सजा का पात्र है। इस घटना ने राज्य में पुलिस के व्यवहार पर कड़ी निगरानी की मांग को और तेज़ किया है।
अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे जांच में सहयोग के लिये कोई भी अतिरिक्त जानकारी प्रदान करें और नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति को सुदृढ़ बनाएं।
शिकायत के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले को दर्ज किया और आरोपी अधिकारी को हिरासत में ले लिया। अब जांच एजेंटों द्वारा पीड़िता और संभावित गवाहों से बयान एकत्र किए जा रहे हैं।
गोवा पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि मामला सक्रिय रूप से जांच में है और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। अधिकारी की पहचान या कार्यालय के सटीक स्थान को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस अधिकारी द्वारा किया गया कोई भी यौन शोषण भारतीय दंड संहिता और बाल यौन शोषण रोकथाम अधिनियम (POCSO) के तहत कड़ी सजा का पात्र है। इस घटना ने राज्य में पुलिस के व्यवहार पर कड़ी निगरानी की मांग को और तेज़ किया है।
अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे जांच में सहयोग के लिये कोई भी अतिरिक्त जानकारी प्रदान करें और नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति को सुदृढ़ बनाएं।