🔥 TRENDING जन्मदिन पर बच्चों को बांटी गई मिठाइयां... Gujarat Introduces Unified Film Shooti... Bill Gates Warns AI Could Cause Billio... Telangana to Open 41 New Bars, Calls f... PCCF Calls for Neighboring States’ Sup... Cuttack Food Safety Officer Transferre...
28 Sep 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা
शहडोल में 300 करोड़ की सरकारी जंगल-जमीन का महाघोटाला: फर्जी पट्टे पर 28 साल तक चला 'खूनी' खेल, कमिश्नर के एक्शन से हड़कंप!

शहडोल में 300 करोड़ की सरकारी जंगल-जमीन का महाघोटाला: फर्जी पट्टे पर 28 साल तक चला 'खूनी' खेल, कमिश्नर के एक्शन से हड़कंप!

✍️ Reporter: राजभान कुशवाहा 🗓 21 Sep 2026, 12:22 AM 👁 90
Watch on: ▶️ YouTube
Share: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post
शहडोल में 300 करोड़ की सरकारी जंगल-जमीन का महाघोटाला: फर्जी पट्टे पर 28 साल तक चला 'खूनी' खेल, कमिश्नर के एक्शन से हड़कंप!
शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में भू-माफिया और राजस्व अधिकारियों की साठगांठ का अब तक का सबसे सनसनीखेज पर्दाफाश हुआ है। गोहपारू तहसील के ग्राम दियापीपर में वन विभाग की मुख्य मार्ग से लगी करीब 300 करोड़ रुपये मूल्य की बेशकीमती जंगल-जमीन को कूट रचित (फर्जी) दस्तावेजों के आधार पर हड़पने और फिर सड़क चौड़ीकरण में शासन से करोड़ों का मुआवजा ऐंठने का एक बड़ा षड्यंत्र बेनकाब हुआ है। कमिश्नर शहडोल संभाग की सख्ती के बाद हल्का पटवारी द्वारा सौंपी गई विस्तृत जांच रिपोर्ट ने समूचे प्रशासनिक अमले की नींव हिला दी है।
फर्जीवाड़े का 'मास्टरप्लान': दूसरे का केस नंबर चुराकर बनाया पट्टा
जांच रिपोर्ट में इस महाघोटाले की जो परतें खुली हैं, वे हैरान कर देने वाली हैं:
असली जमीन का खसरा: ग्राम दियापीपर का खसरा नंबर 703/1 (कुल रकबा 67.60 एकड़ / 27.114 हेक्टेयर) शासन के रिकॉर्ड में वन विभाग की आरक्षित भूमि है।
फर्जी पट्टे की बाजीगरी: इस जमीन से 4.95 एकड़ (2.004 हेक्टेयर) हिस्सा काटकर श्रीमती सारिका प्रकाश के नाम पर एक फर्जी पट्टा (प्रकरण क्रमांक 197/अ-19(4)/1990-91, दिनांक 15.04.1991) दर्ज दिखा दिया गया।
जांच में खुला सच: जिला अभिलेखागार की दायरा पंजी खंगालने पर पता चला कि पट्टे में दर्ज यह प्रकरण क्रमांक वास्तव में ग्राम सरसी के आवेदक रामदास पिता गुलिया का था, जो दशकों पहले ही खारिज हो चुका था! शासन ने सारिका प्रकाश को कभी कोई पट्टा दिया ही नहीं था।
मास्टर बाजीगरी: शातिर भू-माफिया ने खसरा 703/1 से बटांक '703/5' तो बना लिया, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में 703/1 का कुल रकबा 27.114 हेक्टेयर ही रहने दिया ताकि किसी को शक न हो और 28 साल से यह खेल दबा रहे।
फर्जी जमीन की धड़ल्ले से खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्रियों का मायाजाल
सरकारी जंगल की इस जमीन को कागजों पर वैध बनाकर एक के बाद एक कई हाथों में बेचा गया और मोटा मुनाफा कमाया गया:
17 मई 2024: सारिका प्रकाश के नाम की इस फर्जी भूमि का वारिसाना नामांतरण प्रयास कुमार प्रकाश के नाम हुआ।
8 मई 2015: जमीन का 0.733 हेक्टेयर हिस्सा (खसरा 703/5/1) तत्कालीन सोहागपुर राजस्व निरीक्षक के पुत्र नवनीत गौतम को बेचा गया।
26 नवंबर 2024: प्रयास कुमार प्रकाश ने 1.271 हेक्टेयर हिस्सा सुनीला कुमारी को बेचा।
10 नवंबर 2025: नवनीत गौतम ने अपना 0.733 हेक्टेयर हिस्सा जय सिंह तनेजा और वर्षा तनेजा को 20 लाख रुपये में बेच दिया।
अफसरों की 'मिलीभगत': पटवारी की प्रतिकूल रिपोर्ट दरकिनार
नामांतरण के इस खेल में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। ऑनलाइन पोर्टल (साइबर 1.0) पर जब पटवारी ने मौके पर चौहद्दी का मिलान न होने और कानूनी अड़चन की स्पष्ट रिपोर्ट भेजी, तब तत्कालीन तहसीलदार (श्रीमती दिव्या सिंह) और तत्कालीन राजस्व निरीक्षक (श्री गणेश प्रसाद पांडेय) ने कथित मिलीभगत से ऑफलाइन प्रतिवेदन मंगवा लिया और बिना पुराने अभिलेखों की जांच किए तनेजा दंपत्ति के पक्ष में नामांतरण मंजूर कर दिया।
सड़क चौड़ीकरण का मुआवजा हड़पने का बड़ा षड्यंत्र
इस पूरी जालसाजी का मुख्य मकसद राज्य मार्ग (SH 57) टेटका-शहडोल मार्ग के चौड़ीकरण (चेनेज 111+500 से 163+550) के तहत अधिग्रहित हो रही जमीन (0.066 हेक्टेयर) का भारी-भरकम मुआवजा हड़पना था। भू-अर्जन अधिनियम 2013 की धारा 11 के तहत यह प्रक्रिया चल रही थी, जिसे अब जांच रिपोर्ट के बाद तत्काल रोकने की संस्तुति की गई है।
कमिश्नर का सख्त रुख:
कमिश्नर शहडोल संभाग ने मामले में अत्यंत कड़ा रुख अपनाते हुए 7 दिवस के भीतर दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस खुलासे के बाद संभाग के भू-माफिया और दागी अधिकारियों की नींद उड़ गई है।
📲Get App