📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pinakpani
राजनीति
पश्चिम बर्दमान में नेहरू की प्रतिमा फेंकी, कांग्रेस ने आंदोलन की चेतावनी
✍️ Amar Ujala · Maharashtra
🗓 30 अग. 2026, 10:17 PM
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पश्चिम बर्दमान जिले के जंगल में नेहरू की प्रतिमा फेंकी गई, जिससे कांग्रेस ने इस कृत्य के विरोध में आंदोलन की घोषणा की।
पश्चिम बर्दमान जिले के जंगल में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की ठोस प्रतिमा फेंकी गई, यह बात स्थानीय लोगों ने शनिवार को पुलिस को बताई। अधिकारीयों ने घटना की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार यह प्रतिमा जानबूझकर फेंकी गई प्रतीत होती है, परंतु इसके पीछे का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। कोई चोटिल नहीं हुआ और प्रतिमा अभी तक बरामद नहीं हुई है। इस कृत्य ने राजनीतिक नेताओं और जनता में गुस्सा पैदा कर दिया है।
क्षेत्र में कांग्रेस की मजबूत उपस्थिति को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस कार्य की निंदा की और जवाबदेही व प्रतिमा की पुनर्स्थापना की माँग में आंदोलन करने की चेतावनी दी। पार्टी ने राज्य सरकार से शीघ्र कार्रवाई करने का आग्रह किया।
पश्चिम बंगाल की राज्य प्रशासन ने बताया कि जांच टीम को स्थल पर भेजा गया है। वे सीसीटीवी फुटेज की जांच, गवाहों से पूछताछ और स्थानीय वन अधिकारियों के साथ समन्वय कर प्रतिमा के स्रोत और जिम्मेदारों की पहचान करेंगे।
यह घटना देश में सार्वजनिक प्रतीकों पर हुए हालिया हमलों की श्रृंखला में जुड़ती है, जिससे धरोहर वस्तुओं की सुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता के संभावित जोखिमों पर चिंता बढ़ रही है।
पुलिस के अनुसार यह प्रतिमा जानबूझकर फेंकी गई प्रतीत होती है, परंतु इसके पीछे का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। कोई चोटिल नहीं हुआ और प्रतिमा अभी तक बरामद नहीं हुई है। इस कृत्य ने राजनीतिक नेताओं और जनता में गुस्सा पैदा कर दिया है।
क्षेत्र में कांग्रेस की मजबूत उपस्थिति को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस कार्य की निंदा की और जवाबदेही व प्रतिमा की पुनर्स्थापना की माँग में आंदोलन करने की चेतावनी दी। पार्टी ने राज्य सरकार से शीघ्र कार्रवाई करने का आग्रह किया।
पश्चिम बंगाल की राज्य प्रशासन ने बताया कि जांच टीम को स्थल पर भेजा गया है। वे सीसीटीवी फुटेज की जांच, गवाहों से पूछताछ और स्थानीय वन अधिकारियों के साथ समन्वय कर प्रतिमा के स्रोत और जिम्मेदारों की पहचान करेंगे।
यह घटना देश में सार्वजनिक प्रतीकों पर हुए हालिया हमलों की श्रृंखला में जुड़ती है, जिससे धरोहर वस्तुओं की सुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता के संभावित जोखिमों पर चिंता बढ़ रही है।