📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Original: Chirnzb
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राजनीति
मेघालय के एजी पर सुनवाई के लिए 1.5 लाख रुपये लेन का आरोप, बार एसोसिएशन ने कहा झूठा
✍️ Hub News
🗓 31 अक्टू. 2026, 01:13 AM
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बेनाम इनवॉइसों से पता चलता है कि मेघालय के एटॉर्नी जनरल प्रत्येक जिला अदालत की सुनवाई के लिए 1.5 लाख रुपये ले रहे हैं, जिससे राज्य बार एसोसिएशन ने कहा कि उन्होंने झूठ बोला है।
स्थानीय मीडिया द्वारा प्राप्त बेनाम बिलों में यह दिखाया गया है कि मेघालय के एटॉर्नी जनरल प्रत्येक जिला अदालत की सुनवाई के लिए 1.5 लाख रुपये की फीस ले रहे हैं। इन दस्तावेज़ों में व्यक्तिगत सुनवाई और संबंधित शुल्क का विवरण है, जिससे इस प्रकार के भुगतान की वैधता पर सवाल उठे हैं।
मेघालय बार एसोसिएशन ने इन खुलासों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एटॉर्नी जनरल ने अपनी फीस संरचना को लेकर झूठ बोला है और यह प्रथा पेशेवर नैतिकता के विरुद्ध है। एसोसिएशन ने पारदर्शी जांच की मांग की और राज्य सरकार से आग्रह किया कि कोई भी वैधानिक प्रावधान उल्लंघन हो रहा है तो उसकी जाँच की जाए।
प्रकाशन के समय तक एटॉर्नी जनरल के कार्यालय से कोई आधिकारिक टिप्पणी प्राप्त नहीं हुई है। यह मुद्दा राज्य के कानूनी परिषद के आगामी सत्र में चर्चा का विषय बनेगा, जहाँ बार के प्रतिनिधियों और सरकार के प्रतिनिधियों से बिलिंग प्रथा पर स्पष्टता मांगी जाएगी।
यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह मामला मेघालय में वरिष्ठ कानूनी अधिकारियों के शुल्क मानदंडों की पुनः समीक्षा को प्रेरित कर सकता है और भारतीय बार काउंसिल के आचार संहिता के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना बन सकती है।
मेघालय बार एसोसिएशन ने इन खुलासों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एटॉर्नी जनरल ने अपनी फीस संरचना को लेकर झूठ बोला है और यह प्रथा पेशेवर नैतिकता के विरुद्ध है। एसोसिएशन ने पारदर्शी जांच की मांग की और राज्य सरकार से आग्रह किया कि कोई भी वैधानिक प्रावधान उल्लंघन हो रहा है तो उसकी जाँच की जाए।
प्रकाशन के समय तक एटॉर्नी जनरल के कार्यालय से कोई आधिकारिक टिप्पणी प्राप्त नहीं हुई है। यह मुद्दा राज्य के कानूनी परिषद के आगामी सत्र में चर्चा का विषय बनेगा, जहाँ बार के प्रतिनिधियों और सरकार के प्रतिनिधियों से बिलिंग प्रथा पर स्पष्टता मांगी जाएगी।
यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह मामला मेघालय में वरिष्ठ कानूनी अधिकारियों के शुल्क मानदंडों की पुनः समीक्षा को प्रेरित कर सकता है और भारतीय बार काउंसिल के आचार संहिता के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना बन सकती है।