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04 नव. 2026•
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शिक्षा

बिहार में सरकारी शिक्षकों की सैलरी और बच्चों की निजी शिक्षा पर उठा सवाल

✍️ रिपोर्टर: Kanhaiya Kumar Jha 🗓 04 नव. 2026, 07:47 AM 👁 10
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बिहार के सरकारी शिक्षकों द्वारा 50 से 75 हजार रुपये तक की सैलरी लेने के बावजूद अपने बच्चों को निजी संस्थाओं में पढ़ाने की प्रवृत्ति पर सवाल उठ रहे हैं, जिससे शिक्षा मंत्रणा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बिहार में सरकारी शिक्षकों की सैलरी और उनके बच्चों की शिक्षा को लेकर एक गंभीर सवाल उठा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन सरकारी शिक्षक स्वयं 50,000 से 75,000 रुपये तक की सैलरी प्राप्त करते हैं, वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों के बजाय निजी संस्थाओं में पढ़ने के लिए भेजते हैं।

यह प्रवृत्ति इस बात पर सवाल उठाती है कि क्या सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर शिक्षकों का अपना भरोसा नहीं है, या फिर यह जनता के साथ धोखाधड़ी की एक प्रक्रिया है। शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत इन अधिकारियों के इस कदम से सामान्य जनता में असंतोष की लहर दौड़ रही है।

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, जहां लोगों ने इसे 'विरल' ट्रेंड के तौर पर उठाया है। लोगों का मानना है कि जब शिक्षक स्वयं सरकारी शिक्षा पर विश्वास नहीं करते, तो जनता को कैसे विश्वास दिलाया जा सकता है कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है।

यह मामला बिहार की शिक्षा नीति और शिक्षकों की जिम्मेदारी को लेकर नए सवाल खड़े करता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार या शिक्षा विभाग इस प्रवृत्ति पर क्या प्रतिक्रिया देता है और सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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