📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Anchal lilhare
धर्म
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार, हजारों श्रद्धालु उमड़े
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 31 अग. 2026, 08:03 AM
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भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया को उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में त्रिनेत्र, सूर्य‑चंद्रमा और बेलपत्र से सजे बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
उज्जैन के प्राचीन महाकालेश्वर मंदिर ने भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया को एक विशेष पूजा आयोजित की, जिसमें बाबा महाकाल को त्रिनेत्र, सूर्य‑चंद्रमा के प्रतीकात्मक अलंकार और ताज़ी बेलपत्र से सजा कर प्रस्तुत किया गया।
यह अलंकरण शिव के त्रिनेत्र को दर्शाता है, जो उनकी सर्वदृष्टि को प्रतीकित करता है, जबकि सूर्य‑चंद्रमा के प्रतीक उनके समय और ब्रह्मांड पर अधिकार को उजागर करते हैं। इस समय इन प्रतीकों को देखना भक्तों के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
पूरे परिसर में “जय श्री महाकाल” के जयकारों की गूँज सुनाई दी, क्योंकि हजारों श्रद्धालु इस दृश्य को देखने के लिए एकत्र हुए। विभिन्न आयु वर्ग के लोग मंदिर के आंगन में घूमें, प्रार्थना करें और भस्म आरती में भाग लें, जो समारोह का मुख्य बिंदु था।
आयोजकों ने बताया कि यह कार्यक्रम मंदिर के वार्षिक विशेष अनुष्ठानों में से एक है, जो मध्य प्रदेश और आस-पास के राज्यों से भक्तों को आकर्षित करता है। भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा उपाय लागू किए गए थे, जिससे सभी श्रद्धालुओं को सुगम अनुभव मिला।
यह अलंकरण शिव के त्रिनेत्र को दर्शाता है, जो उनकी सर्वदृष्टि को प्रतीकित करता है, जबकि सूर्य‑चंद्रमा के प्रतीक उनके समय और ब्रह्मांड पर अधिकार को उजागर करते हैं। इस समय इन प्रतीकों को देखना भक्तों के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
पूरे परिसर में “जय श्री महाकाल” के जयकारों की गूँज सुनाई दी, क्योंकि हजारों श्रद्धालु इस दृश्य को देखने के लिए एकत्र हुए। विभिन्न आयु वर्ग के लोग मंदिर के आंगन में घूमें, प्रार्थना करें और भस्म आरती में भाग लें, जो समारोह का मुख्य बिंदु था।
आयोजकों ने बताया कि यह कार्यक्रम मंदिर के वार्षिक विशेष अनुष्ठानों में से एक है, जो मध्य प्रदेश और आस-पास के राज्यों से भक्तों को आकर्षित करता है। भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा उपाय लागू किए गए थे, जिससे सभी श्रद्धालुओं को सुगम अनुभव मिला।