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देश का पहला पेस्ट फिल प्रोजेक्ट सिंघाली कोयला खदान, 84 लाख टन कोयले का भंडार, 25 साल तक कोयला उत्पादन करने की योजना

देश का पहला पेस्ट फिल प्रोजेक्ट सिंघाली कोयला खदान, 84 लाख टन कोयले का भंडार, 25 साल तक कोयला उत्पादन करने की योजना

✍️ रिपोर्टर: Vishwanath Pratap Singh 🗓 12 सित. 2026, 08:16 PM 👁 44
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7040 करोड़ के परियोजना के लिए एसईसीएल का टीएमसी के साथ करार हुआ है. सिंघाली खदान में

एसईसीएल के कोरबा में स्थित सिंघाली भूमिगत(underground) कोयला खदान पेस्ट फिल तकनीक को अपनाने वाला कोल इंडिया ही नहीं बल्कि देश का पहला कोयला खदान बन गया है. यहां काम शुरू कर दिया गया है. सब कुछ ठीक रहा तो कंपनी के मुताबिक फरवरी 2027 से उत्पादन शुरू करने की योजना है.

यह पहला अवसर है, जब इस तकनीक का इस्तेमाल भारत में किसी भी कोयला खदान में किया जा रहा है. अब तक ऑस्ट्रेलिया और चीन जैसे देश में इस तकनीक का इस्तेमाल होता रहा है. एक्सपट्र्स और कंपनी के अधिकारी कहते हैं कि इस तरह की तकनीक के इस्तेमाल से पर्यावरण को सबसे कम नुकसान होता है. यह पर्यावरण के अनुकूल इको फ्रेंडली उत्खनन की तकनीक है.
भारत में पहली बार इस तकनीक के उपयोग से उत्खनन होगा. यह उत्खनन की सबसे अत्याधुनिक तकनीक है, जिसका उपयोग एसईसीएल द्वारा किया जा रहा है. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा है कि जहां कोयला बचा रह जाता है. उसे भी इस तकनीक से निकाल लिया जाता है. यह सबसे कम प्रदूषण फैलाने वाली, इको फ्रेंडली तकनीक है, जिसका उपयोग शुरू कर दिया गया है-सनीश चंद्र, पीआरओ, एसईसीएल
वर्तमान में खदान में नई तकनीक से कोयला उत्पादन शुरू करने के लिए रास्ता तैयार किया जा रहा है, जहां से वाहन अंडरग्राउंड माइंस में प्रवेश करेंगे और कोयला उत्खनन शुरू किया जाएगा. इसके साथ ही पेस्ट फीलिंग के लिए भी सरफेस पेस्ट फिल प्लांट तैयार किया जा रहा है, जहां से खदान में बाइंडिंग को उत्खनन के बाद रिक्त हुए खाली स्थान में भरा जाएगा. टीएमसी और एसईसीएल के बीच हुए एमओयू के अनुसार आने वाले 25 वर्षो में इस खदान से 8.4 मिलियन टन कोयला उत्पादन करने की योजना है.
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देश का पहला पेस्ट फिल प्रोजेक्ट सिंघाली कोयला खदान, 84 लाख टन कोयले का भंडार, 25 साल तक कोयला उत्पादन करने की योजना
7040 करोड़ के परियोजना के लिए एसईसीएल का टीएमसी के साथ करार हुआ है. सिंघाली खदान में ETV भारत संवाददाता राजकुमार शाह
PASTE FILL TECHNOLOGY SECL
सिंघाली कोयला खदान (ETV Bharat Chhattisgarh)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : September 12, 2026 at 5:29 PM IST


7 Min Read
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कोरबा: एसईसीएल के कोरबा में स्थित सिंघाली भूमिगत(underground) कोयला खदान पेस्ट फिल तकनीक को अपनाने वाला कोल इंडिया ही नहीं बल्कि देश का पहला कोयला खदान बन गया है. यहां काम शुरू कर दिया गया है. सब कुछ ठीक रहा तो कंपनी के मुताबिक फरवरी 2027 से उत्पादन शुरू करने की योजना है.

यह पहला अवसर है, जब इस तकनीक का इस्तेमाल भारत में किसी भी कोयला खदान में किया जा रहा है. अब तक ऑस्ट्रेलिया और चीन जैसे देश में इस तकनीक का इस्तेमाल होता रहा है. एक्सपट्र्स और कंपनी के अधिकारी कहते हैं कि इस तरह की तकनीक के इस्तेमाल से पर्यावरण को सबसे कम नुकसान होता है. यह पर्यावरण के अनुकूल इको फ्रेंडली उत्खनन की तकनीक है.


सिंघाली कोयला खदान में पेस्ट फिल प्रोजेक्ट (ETV Bharat Chhattisgarh)
भारत में पहली बार इस तकनीक के उपयोग से उत्खनन होगा. यह उत्खनन की सबसे अत्याधुनिक तकनीक है, जिसका उपयोग एसईसीएल द्वारा किया जा रहा है. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा है कि जहां कोयला बचा रह जाता है. उसे भी इस तकनीक से निकाल लिया जाता है. यह सबसे कम प्रदूषण फैलाने वाली, इको फ्रेंडली तकनीक है, जिसका उपयोग शुरू कर दिया गया है-सनीश चंद्र, पीआरओ, एसईसीएल

वर्तमान में खदान में नई तकनीक से कोयला उत्पादन शुरू करने के लिए रास्ता तैयार किया जा रहा है, जहां से वाहन अंडरग्राउंड माइंस में प्रवेश करेंगे और कोयला उत्खनन शुरू किया जाएगा. इसके साथ ही पेस्ट फीलिंग के लिए भी सरफेस पेस्ट फिल प्लांट तैयार किया जा रहा है, जहां से खदान में बाइंडिंग को उत्खनन के बाद रिक्त हुए खाली स्थान में भरा जाएगा. टीएमसी और एसईसीएल के बीच हुए एमओयू के अनुसार आने वाले 25 वर्षो में इस खदान से 8.4 मिलियन टन कोयला उत्पादन करने की योजना है.

First Paste Fill Technology Singhali Coal Mine
सिंघाली कोयला खदान के लिए बनाया जा रहा रास्ता

सबसे पहले समझिए क्या है पेस्ट फिल तकनीक
पेस्ट फिल तकनीक में अंडरग्राउंड माइंस से कोयला निकालने के बाद, खदान के भीतर खाली बचे स्थानों को एक विशेष रूप से तैयार किए गए 'पेस्ट' से भर दिया जाता है. यह पेस्ट फ्लाई ऐश(थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख), ओपनकास्ट खदानों से निकले कुचले हुए पत्थर(ओवरबर्डन), सीमेंट, पानी और बाइंडिंग रसायनों का एक खास प्रकार का मिश्रण होता है. खदान के भीतर जब यह पेस्ट सूखकर सख्त हो जाता है, तब खदान के अंदर यह एक मजबूत स्तंभ बन जाता है. जिससे ऊपर की सतह धंसने से बची रहती है. खदान की स्थिरता बनी रहती है.
पेस्ट फिल तकनीक से फायदा
से जमीन धंसने का खतरा लगभग पूरी तरह से समाप्त हो जाता है, जिससे खदान के ऊपर स्थित गांवों, सड़कों, खेत को कोई नुकसान नहीं होता. इसमें फ्लाई ऐश का भी उपयोग किया जाता है, जो प्रदूषण को कम करने में मदद करता है. कोयला उत्खनन से खदान के भीतर बने रिक्त स्थानों को भरे जाने के कारण कोयले के स्तंभ छोड़ने की आवश्यकता नहीं रह जाती. इससे उन क्षेत्रों से भी कोयला निकाला जा सकता है, जिन्हें पहले सुरक्षा कारणों से छोड़ दिया जाता था. सतह की भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं पड़ती. जो एसईसीएल जैसी कोयला उत्खनन करने वाली कंपनियों के लिए सबसे बड़ी राहत की बात है.
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) में पेस्ट फिल तकनीक (Paste Fill Technology) आधुनिक होने के साथ ही पर्यावरण के अनुकूल भूमिगत खनन एक विधि है. उन खदानों के लिए ये तकनीक विशेष रूप से सर्वाधिक उपयोगी है, जहां घनी आबादी, सड़कें, खेत और बिजली लाइनें है. पारंपरिक खनन में जमीन धंसने का खतरा होता है, जिसे ठीक करना बेहद असुरक्षित होता है. सिंघाली खदान की सतह पर कई बार ऐसी घटनाएं हुई हैं. खेत धंसने के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए बांकीमोंगरा क्षेत्र के किसानों को इसके लिए मुआवजा भी मिला है.

7040 करोड़ की भारी भरकम राशि का होगा निवेश
SECL भारत का पहला कोयला सार्वजनिक उपक्रम है, जिसने इस तकनीक को अपनाया है. सिंघाली भूमिगत खदान में लगभग 7040 करोड़ रुपये के समझौते के साथ इस काम की शुरुआत हो चुकी है. इस पहल का उद्देश्य सीधे तौर पर सुरक्षित और ग्रीन माइनिंग को बढ़ावा देना है. कुछ समय पूर्व एसईसीएल के निदेशक तकनीकी आरसी महापात्रा, क्षेत्रीय महाप्रबंधक राजेश कुमार गुप्ता और टीएमसी के प्रबंध निदेशक अतुल द्विवेदी की उपस्थिति में खदान में पेस्ट फिल तकनीक से कोयला उत्पादन कार्य के लिए भूमिपूजन संपन्न हुआ था. इसके बाद वर्तमान मेंखदान से कोयला उत्पादन की तैयारी शुरू हो गई है. खदान के भीतर जाने वाले रास्ते को तैयार किया जा रहा है.
इस खदान में उत्कृष्ट क्वालिटी के जी-7 ग्रेड नॉन-कोकिंग कोयले का भंडार
सिंघाली भूमिगत खदान में कोयला उत्खनन करने की योजना है. जहां जी-7 ग्रेड नॉन-कोकिंग कोयले का लगभग 8.4 मिलियन टन भंडार अनुमानित है. यह कोयला बेहद उत्कृष्ट क्वालिटी का माना जाता है. जिसका भंडारण देश में बेहद चुनिंदा कोयल खदानों के पास है. एसईसीएल के कोरबा एरिया में संचालित भूमिगत खदान को वर्ष 1989 में 0.24 मिलियन टन प्रति वर्ष उत्पादन के लिए मंजूरी मिली थी, जबकि 1993 सें इस खदान का संचालन शुरू हुआ था. अब तक इस खदान से बोर्ड और पिलर तकनीक से कोयला उत्पादन होता रहा है, जिसमें लोड हॉल डंपर्स, एलएचडी और यूनिवर्सल ड्रिलिंग मशीन, यूडीएम का उपयोग किया गया था.

पर्यावरण के लिए अनुकूल पेस्ट फिल तकनीक
सिंघाली भूमिगत कोयला खदान में पेस्ट फिल तकनीक से पर्यावरण संरक्षण को बढावा मिलेगा, रिक्त स्थानों के भराव की प्रक्रिया भी साथ चलने के कारण जल स्त्रोंत भी सुरक्षा रहेंगे. सस्टेनेबल माइनिंग की परिकल्पना साकार होगी.

देशभर में 2000 मिलियन टन कोयले के भंडार को निकालने की दिशा में पहल
कोल इंडिया लिमिटेड के देश भर में ऐसी कई बंद पड़ी अंडरग्राउंड माइंस हैं. जहां एक अनुमान के मुताबिक 2000 मिलियन टन कोयले का भंडार सुरक्षित है, लेकिन सुरक्षागत करणों से इन्हें निकालना संभव नहीं हो पा रहा है. सिंघाली भूमिगत खदान में पेस्ट फील्ड तकनीक सफल रहती है, तो देश भर में अंडरग्राउंड माइन्स में मौजूद 2000 मिलियन टन कोयले के भंडार को निकालने का मार्ग भी प्रशस्त होगा. जो कोल इंडिया लिमिटेड के लिए एक बड़ी उपलब्धि की तरह होगी. कोल इंडिया लिमिटेड के कोयले के भंडारण में इजाफा होगा.
सिंघाली से शुरू हो रही है प्रक्रिया, दूरगामी होंगे परिणाम
एसईसीएल के पीआरओ सनीश चंद्र ने ईटीवी भारत को बताया कि सिंघाली खदान में पेस्ट फिल तकनीक का उपयोग एसईसीएल के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है. सिंघाली खदान पेस्ट फिलिंग प्रोजेक्ट शुरू करने के बाद एसईसीएल के अन्य भूमिगत कोयला खदानों में इस तकनीक के उपयोग की संभावनाएं भी बढ़ेंगी. देश में यह पहला अवसर है जब इस तकनीक का उपयोग किसी अंडरग्राउंड माइंस में किया जा रहा है. अब तक इसका उपयोग ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में ही किया जाता था. .
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