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25 अक्टू. 2026•
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कृषि

टीकमगढ़ के किसानों को डीएपी के विकल्प के रूप में टीएसपी, अन्नदाता एवं एनपीके उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह

✍️ रिपोर्टर: Pranav Gaur 🗓 25 अक्टू. 2026, 11:39 AM 👁 12
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कृषि विज्ञान केंद्र, टीकमगढ़ के वैज्ञानिकों ने रबी फसलों में बेहतर पैदावार और मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए डीएपी के स्थान पर ट्रिपल सुपर फास्फेट (टीएसपी), अन्नदाता और एनपीके उर्वरकों के संतुलित उपयोग की सलाह दी है।

कृषि विज्ञान केंद्र, टीकमगढ़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.एस. किरार, डॉ. यू.एस. धाकड़ एवं डॉ. एस.के. जाटव ने किसानों को गेहूं, चना, मटर, मसूर एवं सरसों सहित अन्य रबी फसलों में संतुलित उर्वरक उपयोग के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, रबी फसलों की बेहतर पैदावार एवं मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए किसान डीएपी उर्वरक के विकल्प के रूप में ट्रिपल सुपर फास्फेट (टीएसपी), अन्नदाता (20:20:0:13) एवं एनपीके (12:32:16) उर्वरकों का उपयोग कर सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने फसलवार उर्वरक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी है। गेहूं फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 100:60:40 किलोग्राम नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश की आवश्यकता होती है, जिसके लिए 5 बैग यूरिया, 7 बैग एसएसपी एवं 1 बैग पोटाश या अन्य निर्धारित विकल्पों का उपयोग किया जा सकता है। चना, मटर एवं मसूर के लिए प्रति हेक्टेयर 20:60:20 किलोग्राम पोषक तत्वों की आवश्यकता है, जबकि सरसों के लिए 40:20:20 किलोग्राम की आवश्यकता होती है। किसानों को इन फसलों के लिए भी यूरिया, एसएसपी, एनपीके और अन्नदाता के विभिन्न संयोजनों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

टीएसपी के उपयोग के संबंध में वैज्ञानिकों ने बताया कि जिले में यह उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। टीएसपी में लगभग 46 प्रतिशत फास्फोरस होता है, जो डीएपी के समान है, हालांकि इसमें नाइट्रोजन नहीं होती। इसलिए, नाइट्रोजन की आवश्यकता पूरी करने के लिए यूरिया या अन्य उपयुक्त नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों का साथ में उपयोग करना आवश्यक है। किसानों को फसल की आवश्यकता एवं मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का चयन करने की सलाह दी गई है।

इसके अलावा, वैज्ञानिकों ने रासायनिक उर्वरकों के साथ जैव उर्वरकों के समुचित उपयोग की भी सलाह दी है। दलहनी फसलों में राइजोबियम तथा गेहूं में एजोटोबैक्टर के साथ-साथ सभी फसलों में पीएसबी, केएसबी एवं जेडएसबी जैसे जैव उर्वरकों का उपयोग करने की अनुशंसा की गई है, जिससे पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ेगी और मृदा स्वास्थ्य बना रहेगा। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से अपील की है कि वे कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार उर्वरक प्रबंधन अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त करें।
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