📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Earth Science and Remote Sensing Unit, Lyndon B. J
स्वास्थ्य
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान को जोजारी‑लूनी‑बांडी नदियों में अवैध खनन व प्रदूषण पर फटकार, सीबीआई जांच की चेतावनी
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 27 अक्टू. 2026, 01:31 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को जोजारी, लूनी और बांडी नदियों में अवैध खनन व प्रदूषण के लिए कड़ी फटकार दी, 20 लाख लोगों के स्वास्थ्य को खतरा बताकर उपचार संयंत्रों की वित्तीय योजना मांगी।
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणीय क्षति से संबंधित याचिका सुनते हुए राजस्थान की जोजारी, लूनी और बांडी नदी प्रणालियों में अवैध खनन को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने बताया कि अनियंत्रित खनन और उससे उत्पन्न अपशिष्ट ने जल स्रोतों को प्रदूषित कर दिया है, जिससे इन नदियों के किनारे रहने वाले लगभग 20 लाख लोगों के स्वास्थ्य को सीधा खतरा है।
आदेश में राज्य सरकार को मौजूदा खनन नियमों को लागू न करने और पर्याप्त प्रदूषण‑नियंत्रण बुनियादी ढाँचा न प्रदान करने के लिए कड़ी फटकार दी गई। प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में जल की गुणवत्ता बहाल करने हेतु उपचार संयंत्रों के लिये विस्तृत वित्तीय योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने चेतावनी दी कि यदि साक्ष्य को छुपाने या बदलने का कोई प्रयास किया गया तो केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) की जांच की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुपालन की कड़ी निगरानी होगी और कार्यान्वयन न होने पर दंडात्मक कार्रवाई की संभावना है।
यह फैसला पर्यावरणीय शासन में न्यायपालिका की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है और अवैध खनन के खिलाफ कड़ा रुख दर्शाता है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य और पारिस्थितिक संतुलन दोनों को खतरे में डालता है।
आदेश में राज्य सरकार को मौजूदा खनन नियमों को लागू न करने और पर्याप्त प्रदूषण‑नियंत्रण बुनियादी ढाँचा न प्रदान करने के लिए कड़ी फटकार दी गई। प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में जल की गुणवत्ता बहाल करने हेतु उपचार संयंत्रों के लिये विस्तृत वित्तीय योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने चेतावनी दी कि यदि साक्ष्य को छुपाने या बदलने का कोई प्रयास किया गया तो केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) की जांच की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुपालन की कड़ी निगरानी होगी और कार्यान्वयन न होने पर दंडात्मक कार्रवाई की संभावना है।
यह फैसला पर्यावरणीय शासन में न्यायपालिका की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है और अवैध खनन के खिलाफ कड़ा रुख दर्शाता है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य और पारिस्थितिक संतुलन दोनों को खतरे में डालता है।