📷 चित्र स्रोत: TOI India (via NewsData)
देश
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की सीमांकन के लिए 6 महीने की माँग खारिज की
✍️ TOI India
🗓 08 सित. 2026, 09:41 AM
👁 28
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों और रेंज की परिभाषा व सीमांकन के लिए विशेषज्ञ पैनल की छह महीने की माँग को खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने एक सरकारी पैनल द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें अरावली पहाड़ियों और रेंज की परिभाषा को अंतिम रूप देने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय मांगा गया था। पैनल ने वैज्ञानिक डेटा एकत्र करने और विभिन्न हितधारकों से परामर्श करने के लिए अधिक समय की आवश्यकता बताई थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मौजूदा समय सीमा पर्याप्त है और पैनल को बिना किसी और देरी के अपना रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। यह फैसला पर्यावरणीय और भूमि‑उपयोग संबंधी मुद्दों के त्वरित समाधान पर न्यायपालिका के जोर को दर्शाता है, जो कई राज्यों को प्रभावित करता है। पैनल अब आने वाले हफ्तों में अरावली की सीमा और संरक्षण उपायों पर अपना निष्कर्ष प्रस्तुत करेगा।
राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और दिल्ली में फैली अरावली श्रृंखला को शहरी विस्तार के दबाव और पारिस्थितिक महत्व के कारण लंबे समय से संरक्षण बहस का विषय माना जाता रहा है। विस्तार को न मानकर अदालत ने पैनल की सिफ़ारिशों के आधार पर नीतियों को शीघ्र लागू करने का इरादा जताया है। राज्य सरकारें और पर्यावरण समूह अब अदालत द्वारा निर्धारित समय‑सारिणी के अनुसार कार्य करेंगे।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय प्रक्रियात्मक देरी को सीमित करने की अदालत की व्यापक नीति को प्रतिबिंबित करता है, खासकर उन मामलों में जिनका सीधा असर भूमि‑उपयोग योजना और पर्यावरणीय सुरक्षा पर पड़ता है। अब पैनल की आगामी रिपोर्ट अरावली पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े भविष्य के नियमों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और दिल्ली में फैली अरावली श्रृंखला को शहरी विस्तार के दबाव और पारिस्थितिक महत्व के कारण लंबे समय से संरक्षण बहस का विषय माना जाता रहा है। विस्तार को न मानकर अदालत ने पैनल की सिफ़ारिशों के आधार पर नीतियों को शीघ्र लागू करने का इरादा जताया है। राज्य सरकारें और पर्यावरण समूह अब अदालत द्वारा निर्धारित समय‑सारिणी के अनुसार कार्य करेंगे।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय प्रक्रियात्मक देरी को सीमित करने की अदालत की व्यापक नीति को प्रतिबिंबित करता है, खासकर उन मामलों में जिनका सीधा असर भूमि‑उपयोग योजना और पर्यावरणीय सुरक्षा पर पड़ता है। अब पैनल की आगामी रिपोर्ट अरावली पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े भविष्य के नियमों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।