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समाजवादी विचारों में बदलाव: प्रेम विवाह पर पूर्व विरोधी की नई दलील
एक समय प्रेम विवाह के कट्टर विरोधी रहे मनिष कश्यप ने अब इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के रूप में स्वीकार किया, जिससे सामाजिक मान्यताओं पर प्रश्न उठे।
मनिष कश्यप, जो पहले प्रेम विवाह के कट्टर विरोधी के रूप में समाज को अपने विचार सुनाते थे, अब अपनी ही निजी स्थिति में इस मुद्दे को अलग दृष्टिकोण से देख रहे हैं।
विवाह से पहले लड़का‑लड़की के मिलन‑जुलन को संस्कृति के विरुद्ध मानते हुए वह महिलाओं के वस्त्र, रहन‑सहन आदि पर विस्तृत ज्ञान प्रस्तुत करते थे और अपने भाषणों में संस्कार व नसीहतें देते थे।
परंतु जीवन ने उन्हें उसी मोड़ पर ला खड़ा किया जहाँ वह अक्सर दूसरों को खड़ा करता थे; अब वह प्रेम विवाह को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के रूप में स्वीकार कर रहे हैं।
इस बदलाव ने यह प्रश्न उठाया कि क्या वही स्वतंत्रता जो अब उन्हें प्रिय लगती है, कल दूसरों के लिए अपराध जैसा क्यों दिखती थी, तथा नैतिकता को दूसरों पर लागू करने की दोहरी मानदंडता कितनी उचित है।
समाज को उपदेश देने से पहले अपने विचारों की समीक्षा करनी चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का अधिकार है।
विवाह से पहले लड़का‑लड़की के मिलन‑जुलन को संस्कृति के विरुद्ध मानते हुए वह महिलाओं के वस्त्र, रहन‑सहन आदि पर विस्तृत ज्ञान प्रस्तुत करते थे और अपने भाषणों में संस्कार व नसीहतें देते थे।
परंतु जीवन ने उन्हें उसी मोड़ पर ला खड़ा किया जहाँ वह अक्सर दूसरों को खड़ा करता थे; अब वह प्रेम विवाह को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के रूप में स्वीकार कर रहे हैं।
इस बदलाव ने यह प्रश्न उठाया कि क्या वही स्वतंत्रता जो अब उन्हें प्रिय लगती है, कल दूसरों के लिए अपराध जैसा क्यों दिखती थी, तथा नैतिकता को दूसरों पर लागू करने की दोहरी मानदंडता कितनी उचित है।
समाज को उपदेश देने से पहले अपने विचारों की समीक्षा करनी चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का अधिकार है।