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रायबरेली: हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद तालाब की जमीन पर बने स्कूल पर नहीं हुई कार्रवाई, शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मांगी न्याय
रायबरेली के जोहवाशर्की गांव में तालाब की जमीन पर अवैध रूप से बने स्कूल को गिराने के हाईकोर्ट के 2024 के आदेश का अब तक अनुपालन नहीं कराया गया है। शिकायतकर्ता ने प्रशासनिक लापरवाही और धमकियों का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है।
रायबरेली में सरकारी और सार्वजनिक जमीनों पर अवैध कब्जों के मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। सदर तहसील क्षेत्र के जोहवाशर्की गांव में तालाब की जमीन पर कथित रूप से किए गए स्कूल निर्माण को लेकर शिकायतकर्ता न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर है। आरोप है कि स्कूल निर्माण को ध्वस्त करने के लिए वर्ष 2024 में हाईकोर्ट से आदेश जारी हुआ था, जिसमें स्कूल संचालक पर साढ़े तीन लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। हालांकि, अब तक इस आदेश का अनुपालन नहीं कराया गया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सदर तहसील प्रशासन की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। वह लगातार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन उसे न्याय नहीं मिल पा रहा है। शिकायतकर्ता ने स्कूल संचालक पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उसे मामले में सुलह-समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है और समझौता करने से इनकार करने पर धमकी भी दी जा रही है।
इसी को लेकर बुधवार को शिकायतकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय और सदर तहसील पहुंचा। वहां अधिकारियों से पूरे मामले की शिकायत करते हुए उसने हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने तथा अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब वर्ष 2024 में ही हाईकोर्ट से आदेश जारी हो चुका है, तो आखिर अब तक उसका अनुपालन क्यों नहीं कराया गया? क्या प्रशासन तालाब की जमीन को कब्जामुक्त करा पाएगा या फिर शिकायतकर्ता को न्याय के लिए इसी तरह अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ेंगे?
शिकायतकर्ता का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सदर तहसील प्रशासन की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। वह लगातार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन उसे न्याय नहीं मिल पा रहा है। शिकायतकर्ता ने स्कूल संचालक पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उसे मामले में सुलह-समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है और समझौता करने से इनकार करने पर धमकी भी दी जा रही है।
इसी को लेकर बुधवार को शिकायतकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय और सदर तहसील पहुंचा। वहां अधिकारियों से पूरे मामले की शिकायत करते हुए उसने हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने तथा अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब वर्ष 2024 में ही हाईकोर्ट से आदेश जारी हो चुका है, तो आखिर अब तक उसका अनुपालन क्यों नहीं कराया गया? क्या प्रशासन तालाब की जमीन को कब्जामुक्त करा पाएगा या फिर शिकायतकर्ता को न्याय के लिए इसी तरह अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ेंगे?