रामगढ़ मुराड़ा उप स्वास्थ्य केंद्र पर ताला, ग्रामीणों में फूटा आक्रोश
रामगढ़ मुराड़ा उप स्वास्थ्य केंद्र पर ताला, ग्रामीणों में फूटा आक्रोश
हफ़्तों से बंद पड़ा है अस्पताल; मौसमी बीमारियों के बीच दवाइयों के लिए भटक रहे मरीज़
सवाई माधोपुर। जिला अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत रामगढ़ मुराड़ा के राजकीय उप स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पिछले एक महीने से पूरी तरह बंद पड़ा है और इसके मुख्य दरवाजे पर ताला लटका हुआ है। स्वास्थ्य केंद्र के लगातार बंद रहने के कारण क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ठप हो चुकी हैं।
मरीजों की बढ़ी मुश्किलें, निजी क्लीनिकों की शरण में गरीब
गांव में फैली मौसमी बीमारियों के प्रकोप के बीच इस केंद्र पर ताला लगे होने से स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। अस्पताल के बाहर रोजाना बुजुर्ग, महिलाएं और बीमार बच्चे इलाज तथा सामान्य दवाइयों के लिए घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें बंद ताले के सिवाय कुछ हासिल नहीं होता। इस अव्यवस्था के चलते गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों को महंगे निजी क्लीनिकों के चंगुल में फंसना पड़ रहा है, जिससे उन पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
सप्ताह में सिर्फ एक दिन आती हैं एएनएम
ग्रामीणों ने प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करते हुए बताया कि इस उप स्वास्थ्य केंद्र पर पूरे सप्ताह में केवल एक दिन (गुरुवार को) एएनएम केवल टीकाकरण के काम के लिए पहुंचती हैं। इसके अलावा बाकी के छह दिन अस्पताल पूरी तरह बंद रहता है। अस्पताल में कोई नियमित स्टाफ या डॉक्टर मौजूद नहीं रहता।
आंदोलन और चक्का जाम की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले में तुरंत संज्ञान लेने और उप स्वास्थ्य केंद्र पर नियमित स्टाफ व डॉक्टरों की स्थायी तैनाती करने की पुरजोर मांग की है। इसके साथ ही ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस समस्या का जल्द से जल्द कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो वे उग्र धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम करने के लिए बाध्य होंगे।
हफ़्तों से बंद पड़ा है अस्पताल; मौसमी बीमारियों के बीच दवाइयों के लिए भटक रहे मरीज़
सवाई माधोपुर। जिला अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत रामगढ़ मुराड़ा के राजकीय उप स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पिछले एक महीने से पूरी तरह बंद पड़ा है और इसके मुख्य दरवाजे पर ताला लटका हुआ है। स्वास्थ्य केंद्र के लगातार बंद रहने के कारण क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ठप हो चुकी हैं।
मरीजों की बढ़ी मुश्किलें, निजी क्लीनिकों की शरण में गरीब
गांव में फैली मौसमी बीमारियों के प्रकोप के बीच इस केंद्र पर ताला लगे होने से स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। अस्पताल के बाहर रोजाना बुजुर्ग, महिलाएं और बीमार बच्चे इलाज तथा सामान्य दवाइयों के लिए घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें बंद ताले के सिवाय कुछ हासिल नहीं होता। इस अव्यवस्था के चलते गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों को महंगे निजी क्लीनिकों के चंगुल में फंसना पड़ रहा है, जिससे उन पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
सप्ताह में सिर्फ एक दिन आती हैं एएनएम
ग्रामीणों ने प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करते हुए बताया कि इस उप स्वास्थ्य केंद्र पर पूरे सप्ताह में केवल एक दिन (गुरुवार को) एएनएम केवल टीकाकरण के काम के लिए पहुंचती हैं। इसके अलावा बाकी के छह दिन अस्पताल पूरी तरह बंद रहता है। अस्पताल में कोई नियमित स्टाफ या डॉक्टर मौजूद नहीं रहता।
आंदोलन और चक्का जाम की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले में तुरंत संज्ञान लेने और उप स्वास्थ्य केंद्र पर नियमित स्टाफ व डॉक्टरों की स्थायी तैनाती करने की पुरजोर मांग की है। इसके साथ ही ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस समस्या का जल्द से जल्द कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो वे उग्र धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम करने के लिए बाध्य होंगे।