Health
पटना में आर आरएम के आरसी के एडिओपिटी सेंटर का उद्घाटन
आईसीएमआरएम आर एम के एडीओपीटी सेंटर का उद्घाटन राज्य के स्वास्थ्य तकनीक को मिलेगा बढ़ावा
पटना से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट आईसीएमआर आरएम आरसी के एडीओपीटी सेंटर का उद्घाटन, राज्यों में स्वास्थ्य तकनीकों को मिलेगा बढ़ावा
पटना, 28 अक्टूबर। बिहार की राजधानी पटना में स्वास्थ्य अनुसंधान और तकनीक के प्रसार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट (ICMR-RM NIIHR), पटना के एसएटीडीआरसी भवन के पांचवें तल पर बुधवार को ‘एडीओपीटी सेंटर’ (ADOPT Centre) का उद्घाटन किया गया। इस केंद्र का उद्देश्य राज्यों के स्वास्थ्य कार्यक्रमों में स्वास्थ्य तकनीक आकलन इन इंडिया (HTAIn) की अनुशंसित तकनीकों के प्रसार और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को गति देना है।
केंद्र का उद्घाटन संस्थान के निदेशक डॉ. कृष्णा पांडेय के कर-कमलों द्वारा किया गया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. नियामत अली सिद्दीकी थे, जो वैज्ञानिक-एफ के पद पर कार्यरत हैं। उद्घाटन समारोह की शुरुआत दोपहर 3 बजे पंजीकरण और नेटवर्किंग के साथ हुई। इसके बाद मास्टर ऑफ सेरेमनी के संचालन में औपचारिक उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. कृष्णा पांडेय ने स्वागत भाषण दिया।
इस अवसर पर नई दिल्ली स्थित स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग और आईसीएमआर से जुड़ी सीनियर साइंटिस्ट डॉ. कविता राजशेखर ने स्वास्थ्य तकनीक आकलन इन इंडिया (HTAIn) और एडीओपीटी सेंटर की भूमिका पर विस्तृत प्रस्तुति दी। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नेगलेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीज के राज्य समन्वयक डॉ. राजेश पांडेय ने विशेष अतिथि के रूप में संबोधन किया।
कार्यक्रम में वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (VBDCP) के अतिरिक्त निदेशक सह राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. एन.के. सिन्हा ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और एडीओपीटी सेंटर की स्थापना की आधिकारिक घोषणा की।
समारोह के अगले चरण में अतिथियों ने केंद्र की पट्टिका का अनावरण किया और संस्थान की ओर से तैयार डिस्प्ले का अवलोकन किया। कार्यक्रम के अंत में एडीओपीटी सेंटर की लीड पीआई की ओर से धन्यवाद ज्ञापन किया गया। इसके बाद सामूहिक फोटोग्राफी और अल्पाहार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
यह नया केंद्र साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य तकनीकों के कार्यान्वयन में सहयोग देने के लिए एक क्षेत्रीय मंच के रूप में कार्य करेगा। इसके माध्यम से राज्यों के स्वास्थ्य कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने और स्वास्थ्य सेवाओं में अनुशंसित तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
पटना, 28 अक्टूबर। बिहार की राजधानी पटना में स्वास्थ्य अनुसंधान और तकनीक के प्रसार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट (ICMR-RM NIIHR), पटना के एसएटीडीआरसी भवन के पांचवें तल पर बुधवार को ‘एडीओपीटी सेंटर’ (ADOPT Centre) का उद्घाटन किया गया। इस केंद्र का उद्देश्य राज्यों के स्वास्थ्य कार्यक्रमों में स्वास्थ्य तकनीक आकलन इन इंडिया (HTAIn) की अनुशंसित तकनीकों के प्रसार और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को गति देना है।
केंद्र का उद्घाटन संस्थान के निदेशक डॉ. कृष्णा पांडेय के कर-कमलों द्वारा किया गया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. नियामत अली सिद्दीकी थे, जो वैज्ञानिक-एफ के पद पर कार्यरत हैं। उद्घाटन समारोह की शुरुआत दोपहर 3 बजे पंजीकरण और नेटवर्किंग के साथ हुई। इसके बाद मास्टर ऑफ सेरेमनी के संचालन में औपचारिक उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. कृष्णा पांडेय ने स्वागत भाषण दिया।
इस अवसर पर नई दिल्ली स्थित स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग और आईसीएमआर से जुड़ी सीनियर साइंटिस्ट डॉ. कविता राजशेखर ने स्वास्थ्य तकनीक आकलन इन इंडिया (HTAIn) और एडीओपीटी सेंटर की भूमिका पर विस्तृत प्रस्तुति दी। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नेगलेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीज के राज्य समन्वयक डॉ. राजेश पांडेय ने विशेष अतिथि के रूप में संबोधन किया।
कार्यक्रम में वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (VBDCP) के अतिरिक्त निदेशक सह राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. एन.के. सिन्हा ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और एडीओपीटी सेंटर की स्थापना की आधिकारिक घोषणा की।
समारोह के अगले चरण में अतिथियों ने केंद्र की पट्टिका का अनावरण किया और संस्थान की ओर से तैयार डिस्प्ले का अवलोकन किया। कार्यक्रम के अंत में एडीओपीटी सेंटर की लीड पीआई की ओर से धन्यवाद ज्ञापन किया गया। इसके बाद सामूहिक फोटोग्राफी और अल्पाहार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
यह नया केंद्र साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य तकनीकों के कार्यान्वयन में सहयोग देने के लिए एक क्षेत्रीय मंच के रूप में कार्य करेगा। इसके माध्यम से राज्यों के स्वास्थ्य कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने और स्वास्थ्य सेवाओं में अनुशंसित तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम किया जाएगा।