NH-148 दौसा-मनोहरपुर 'मौत का हाईवे' बना, मासूम आयशा की मौत के बाद ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
NH-148 दौसा-मनोहरपुर 'मौत का हाईवे' बना, मासूम आयशा की मौत के बाद ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
पूर्व से वर्तमान तक सभी विधायकों को ठहराया जिम्मेदार*
*प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री से मुआवजे और सुरक्षा की मांग, परसों हाईवे जाम की चेतावनी
*दौसा।* *NH-148 दौसा-मनोहरपुर हाईवे* पर जयसिंहपुर कट* के पास ट्रक की चपेट में आने से *7 वर्षीय मासूम आयशा धमोरा की मौत के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। आयशा अपनी बड़ी बहन के साथ रोड क्रॉस कर रही थी तभी तेज रफ्तार ट्रक ने उसे कुचल दिया। उसे तुरंत निम्स अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया
*लगातार 5 दिन से हादसे, हाईवे बना 'मौत का हाईवे'*
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले 5 दिनों से इस हाईवे पर लगातार शर्मनाक हादसे हो रहे हैं। पहली घटना रायसर के पास एक खाटू श्याम जी के जाकर आने वाली मारुति नियंत्रण होकर खाई में जाकर गिरी जिससे पांच लोगों की मौत हो गई दूसरी घटना जयसिंहपुर के पास एक ट्रक और नियंत्रण होकर खाई में गिरा तीसरी घटना जयसिंहपुरा के पास एक मोटरसाइकिल का एक्सीडेंट हो गया चौथी घटना गठवाडी के पास दुर्घटना हुई पांचवीं घटना 7 साल की मासूम बच्ची आयशा धमोरा ट्रक की चपेट में आ गई जगह-जगह बने अवैध कट दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बन रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि इस हाईवे पर अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। इसे 'मौत का हाईवे' कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
*विधायक से लेकर प्रधानमंत्री तक को ठहराया जिम्मेदार*
*ग्रामीणों ने इस लापरवाही के लिए पूर्व से वर्तमान तक सभी जनप्रतिनिधियों* को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि जब यह रोड बनी थी तब गोपाल मीणा विधायक थे, फिर जगदीश नारायण मीणा और अब महेंद्रपाल मीणा विधायक हैं। लेकिन किसी ने भी कट बंद कराने और सुरक्षा के इंतजाम के लिए कोई एक्शन नहीं लिया।
इसलिए इस 'मौत के हाईवे' की पूरी जिम्मेदारी विधायक, राज्य सरकार, मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री की है।
*पुलिस पर भी लगे आरोप*
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चौकी में बैठे पुलिसकर्मी बिना वजह वाहनों के चालान काट रहे हैं। चालान के डर से ट्रक चालक तेज गति से गाड़ी भगाते हैं और कट पर हादसा कर देते हैं। चालान काटने का अधिकार केवल ट्रैफिक पुलिस का है
*मुख्य मांगें*
मृतका आयशा के परिजनों को सरकार की ओर से अधिकतम आर्थिक मुआवजा* दिया जाए। बच्ची वापस नहीं आ सकती लेकिन परिवार को संबल मिले. हाईवे पर बने सभी अवैध कट तुरंत बंद किए जाएं।
*जब तक फोरलेन नहीं बनती, तब तक सर्विस रोड* का निर्माण कराया जाए।
पुलिस चौकियों पर चालान प्रक्रिया की *उच्च स्तरीय जांच* हो।
*48 घंटे में कार्रवाई नहीं हुई तो परसों हाईवे जाम*
ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, जिला कलेक्टर, पुलिस प्रशासन और स्थानीय विधायक को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 48 घंटे के अंदर उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो परसों NH-148 को पूरी तरह जाम किया जाएगा
उन्होंने कहा कि जब तक कट बंद नहीं होते और सुरक्षित रास्ता नहीं मिलता, तब तक आदोलन जारी रहेगा
पूर्व से वर्तमान तक सभी विधायकों को ठहराया जिम्मेदार*
*प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री से मुआवजे और सुरक्षा की मांग, परसों हाईवे जाम की चेतावनी
*दौसा।* *NH-148 दौसा-मनोहरपुर हाईवे* पर जयसिंहपुर कट* के पास ट्रक की चपेट में आने से *7 वर्षीय मासूम आयशा धमोरा की मौत के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। आयशा अपनी बड़ी बहन के साथ रोड क्रॉस कर रही थी तभी तेज रफ्तार ट्रक ने उसे कुचल दिया। उसे तुरंत निम्स अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया
*लगातार 5 दिन से हादसे, हाईवे बना 'मौत का हाईवे'*
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले 5 दिनों से इस हाईवे पर लगातार शर्मनाक हादसे हो रहे हैं। पहली घटना रायसर के पास एक खाटू श्याम जी के जाकर आने वाली मारुति नियंत्रण होकर खाई में जाकर गिरी जिससे पांच लोगों की मौत हो गई दूसरी घटना जयसिंहपुर के पास एक ट्रक और नियंत्रण होकर खाई में गिरा तीसरी घटना जयसिंहपुरा के पास एक मोटरसाइकिल का एक्सीडेंट हो गया चौथी घटना गठवाडी के पास दुर्घटना हुई पांचवीं घटना 7 साल की मासूम बच्ची आयशा धमोरा ट्रक की चपेट में आ गई जगह-जगह बने अवैध कट दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बन रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि इस हाईवे पर अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। इसे 'मौत का हाईवे' कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
*विधायक से लेकर प्रधानमंत्री तक को ठहराया जिम्मेदार*
*ग्रामीणों ने इस लापरवाही के लिए पूर्व से वर्तमान तक सभी जनप्रतिनिधियों* को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि जब यह रोड बनी थी तब गोपाल मीणा विधायक थे, फिर जगदीश नारायण मीणा और अब महेंद्रपाल मीणा विधायक हैं। लेकिन किसी ने भी कट बंद कराने और सुरक्षा के इंतजाम के लिए कोई एक्शन नहीं लिया।
इसलिए इस 'मौत के हाईवे' की पूरी जिम्मेदारी विधायक, राज्य सरकार, मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री की है।
*पुलिस पर भी लगे आरोप*
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चौकी में बैठे पुलिसकर्मी बिना वजह वाहनों के चालान काट रहे हैं। चालान के डर से ट्रक चालक तेज गति से गाड़ी भगाते हैं और कट पर हादसा कर देते हैं। चालान काटने का अधिकार केवल ट्रैफिक पुलिस का है
*मुख्य मांगें*
मृतका आयशा के परिजनों को सरकार की ओर से अधिकतम आर्थिक मुआवजा* दिया जाए। बच्ची वापस नहीं आ सकती लेकिन परिवार को संबल मिले. हाईवे पर बने सभी अवैध कट तुरंत बंद किए जाएं।
*जब तक फोरलेन नहीं बनती, तब तक सर्विस रोड* का निर्माण कराया जाए।
पुलिस चौकियों पर चालान प्रक्रिया की *उच्च स्तरीय जांच* हो।
*48 घंटे में कार्रवाई नहीं हुई तो परसों हाईवे जाम*
ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, जिला कलेक्टर, पुलिस प्रशासन और स्थानीय विधायक को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 48 घंटे के अंदर उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो परसों NH-148 को पूरी तरह जाम किया जाएगा
उन्होंने कहा कि जब तक कट बंद नहीं होते और सुरक्षित रास्ता नहीं मिलता, तब तक आदोलन जारी रहेगा