📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Press Information Department
राजनीति
मंत्री बिस्वजित डाइमारी ने कहा, यूएलएफए ने असम की रक्षा 50 साल से की
✍️ India Today NE
🗓 28 अक्टू. 2026, 04:37 PM
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असम के गृह मंत्री बिस्वजित डाइमारी ने यूएलएफए की प्रशंसा की, कहा यह समूह 50 साल से असम की सुरक्षा करता आया है।
असम के गृह मंत्री बिस्वजित डाइमारी ने संयुक्त मुक्तिकरण मोर्चा (यूएलएफए) की प्रशंसा की, यह कहा कि यह समूह पिछले पचास वर्षों से असम की सुरक्षा में एक ढाल की तरह काम करता आया है। यह टिप्पणी मंत्री ने एक पत्रकार सम्मेलन में दी, जहाँ उन्होंने यूएलएफए की भूमिका को असम की सीमाओं और स्थानीय हितों की रक्षा में उल्लेख किया।
यूएलएफए का गठन 1979 में हुआ था और वह भारतीय सरकार के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह में शामिल रहा है। जबकि इस समूह को प्रतिबंधित संगठन के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, मंत्री का यह बयान क्षेत्रीय सुरक्षा पर उसके प्रभाव को स्वीकार करने वाला एक जटिल दृष्टिकोण दर्शाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी प्रशंसा पूर्व उग्रवादियों के साथ संवाद को प्रोत्साहित करने और पूर्वोत्तर में शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से की गई हो सकती है। सरकार ने अभी तक इस पर कोई नीति परिवर्तन नहीं बताया है, और यह बयान केवल डाइमारी के व्यक्तिगत मूल्यांकन तक सीमित है।
इस टिप्पणी पर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ आई हैं; कुछ नागरिक समाज समूह सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं, जबकि अन्य इसे पूर्व उग्रवादियों को मुख्यधारा की राजनीति में शामिल करने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं।
यूएलएफए का गठन 1979 में हुआ था और वह भारतीय सरकार के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह में शामिल रहा है। जबकि इस समूह को प्रतिबंधित संगठन के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, मंत्री का यह बयान क्षेत्रीय सुरक्षा पर उसके प्रभाव को स्वीकार करने वाला एक जटिल दृष्टिकोण दर्शाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी प्रशंसा पूर्व उग्रवादियों के साथ संवाद को प्रोत्साहित करने और पूर्वोत्तर में शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से की गई हो सकती है। सरकार ने अभी तक इस पर कोई नीति परिवर्तन नहीं बताया है, और यह बयान केवल डाइमारी के व्यक्तिगत मूल्यांकन तक सीमित है।
इस टिप्पणी पर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ आई हैं; कुछ नागरिक समाज समूह सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं, जबकि अन्य इसे पूर्व उग्रवादियों को मुख्यधारा की राजनीति में शामिल करने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं।