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मधुबनी में डीएम आनंद शर्मा के साथ दुर्व्यवहार: पुलिस-प्रशासन मौजूद रहने पर भी निशाना बने, जांच की मांग
मधुबनी के जिलाधिकारी आनंद शर्मा के साथ कॉलर पकड़कर खींचतान और मारपीट की कोशिश की गई। घटनास्थल पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद होने के बावजूद यह घटना सामने आई है, जिसके बाद निष्पक्ष जांच की मांग उठी है।
मधुबनी के जिलाधिकारी आनंद शर्मा के साथ हुए दुर्व्यवहार की घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, डीएम साहब के साथ कॉलर पकड़कर खींचतान और मारपीट की कोशिश की गई, जो एक जिला स्तरीय अधिकारी के प्रति अत्यंत गंभीर अपमान माना जा रहा है।
घटनास्थल पर थाना प्रभारी, डीएसपी और एसपी सहित पूरा पुलिस-प्रशासनिक दल मौजूद था, फिर भी डीएम ही निशाने पर आए। इस घटनाक्रम ने यह सवाल उठाया है कि भीड़ को उकसाने वाला कौन था और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच क्यों नहीं हो रही है। घटना को बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया जा रहा है, जिसके बाद निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग जोरों पर है।
मधुबनी की धरती पर हाल ही में नरसंहार की घटना हुई थी, जबकि बिहार में आए दिन हत्या, अपहरण, लूट और दुष्कर्म की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे माहौल में प्रशासनिक अधिकारी के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र और कानून की गरिमा के लिए चिंताजनक है। सवाल किसी व्यक्ति या पार्टी के बचाव का नहीं, बल्कि कानून और प्रशासनिक गरिमा की रक्षा का है।
डीएम आनंद शर्मा को लेकर यह भी चर्चा है कि क्या उनका दोष ब्राह्मण होना, ईमानदार होना या कुछ नेताओं के सामने न झुकना है? भाजपा के कुछ सांसदों और विधायकों के साथ उनकी तनातनी की चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं। हालांकि, लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है, लेकिन कानून हाथ में लेना स्वीकार्य नहीं है। घटना की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो और डीएम के साथ हुए दुर्व्यवहार की जवाबदेही तय हो, यह आम जनता की उम्मीद है।
घटनास्थल पर थाना प्रभारी, डीएसपी और एसपी सहित पूरा पुलिस-प्रशासनिक दल मौजूद था, फिर भी डीएम ही निशाने पर आए। इस घटनाक्रम ने यह सवाल उठाया है कि भीड़ को उकसाने वाला कौन था और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच क्यों नहीं हो रही है। घटना को बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया जा रहा है, जिसके बाद निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग जोरों पर है।
मधुबनी की धरती पर हाल ही में नरसंहार की घटना हुई थी, जबकि बिहार में आए दिन हत्या, अपहरण, लूट और दुष्कर्म की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे माहौल में प्रशासनिक अधिकारी के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र और कानून की गरिमा के लिए चिंताजनक है। सवाल किसी व्यक्ति या पार्टी के बचाव का नहीं, बल्कि कानून और प्रशासनिक गरिमा की रक्षा का है।
डीएम आनंद शर्मा को लेकर यह भी चर्चा है कि क्या उनका दोष ब्राह्मण होना, ईमानदार होना या कुछ नेताओं के सामने न झुकना है? भाजपा के कुछ सांसदों और विधायकों के साथ उनकी तनातनी की चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं। हालांकि, लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है, लेकिन कानून हाथ में लेना स्वीकार्य नहीं है। घटना की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो और डीएम के साथ हुए दुर्व्यवहार की जवाबदेही तय हो, यह आम जनता की उम्मीद है।