महंत कन्हैयानाथ राजपूत धर्मशाला के बदहाली के हालात
Watch on:
▶️ YouTube
नाचना की ऐतिहासिक महंत श्री कन्हैयानाथ राजपूत धर्मशाला बदहाली के आंसू बहाने को मजबूर, समाज बंधुओं से जीर्णोद्धार की अपील
नाचना (जैसलमेर):
कस्बे के बस स्टैंड व प्राचीन शिव मंदिर के पास स्थित ऐतिहासिक 'महंत श्री कन्हैयानाथ राजपूत धर्मशाला' देखरेख के अभाव में इन दिनों बदहाली का शिकार है। पिछले 25 से अधिक वर्षों से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों, बुजुर्गों और माताओं-बहनों के विश्राम का मुख्य केंद्र रही यह सार्वजनिक सराय अब प्रशासनिक उदासीनता और सामाजिक अनदेखी के कारण जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी है।
समस्याएं और दुर्दशा के मुख्य बिंदु:
अतिक्रमण और अवैध कब्जे: सार्वजनिक उपयोग के लिए बने कमरों को कुछ लोगों ने अपना व्यक्तिगत गोदाम बना लिया है।
गंदगी व जलभराव: परिसर में चारों तरफ कचरे के ढेर लगे हैं। बारिश के दौरान जल निकासी की ठोस व्यवस्था न होने से परिसर में पानी भर जाता है, जिससे मच्छर व बीमारियां फैलने का अंदेशा बना रहता है।
संसाधनों की दुर्दशा: परिसर में बना पानी का टांका सूखा पड़ा है और पुराना शौचालय बेहद गंदगी से भरा हुआ है।
असुविधा और शर्मिंदगी: सराय के आगे लगे हैंडपंप पर आसपास के मजदूरों के खुले में नहाने से कीचड़ फैलता है। इससे वहां ठहरने वाली महिलाओं और यात्रियों को भारी असुविधा व शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।
वर्तमान में धर्मशाला के रखरखाव के लिए कोई सक्रिय समिति या जिम्मेदार व्यक्ति तैनात नहीं है, जिससे यह सामाजिक धरोहर धीरे-धीरे नष्ट होने की कगार पर है।
सकारात्मक पहल व जीर्णोद्धार के लिए अपील:
स्थानीय समाज बंधुओं ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए राजपूत समाज से एकजुट होकर आगे आने का आह्वान किया है।
प्रबंधन समिति का गठन: जल्द से जल्द समाज की एक विशेष बैठक बुलाकर धर्मशाला की देखरेख के लिए कार्यकारिणी का गठन किया जाए।
स्वच्छता व बेदखली अभियान: धर्मशाला से अवैध कब्जे व गोदाम तुरंत खाली करवाए जाएं और व्यापक सफाई अभियान चलाया जाए।
मूलभूत सुविधाओं का विकास: परिसर में नए शौचालय, स्नानागार, पेयजल व्यवस्था तथा बारिश के पानी की निकासी के स्थायी इंतजाम किए जाएं।
मेघ सिंह का कहना है कि सामूहिक प्रयास और सहयोग से ही इस साझा धरोहर के गौरव को पुनः लौटाया जा सकता है।
नाचना (जैसलमेर):
कस्बे के बस स्टैंड व प्राचीन शिव मंदिर के पास स्थित ऐतिहासिक 'महंत श्री कन्हैयानाथ राजपूत धर्मशाला' देखरेख के अभाव में इन दिनों बदहाली का शिकार है। पिछले 25 से अधिक वर्षों से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों, बुजुर्गों और माताओं-बहनों के विश्राम का मुख्य केंद्र रही यह सार्वजनिक सराय अब प्रशासनिक उदासीनता और सामाजिक अनदेखी के कारण जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी है।
समस्याएं और दुर्दशा के मुख्य बिंदु:
अतिक्रमण और अवैध कब्जे: सार्वजनिक उपयोग के लिए बने कमरों को कुछ लोगों ने अपना व्यक्तिगत गोदाम बना लिया है।
गंदगी व जलभराव: परिसर में चारों तरफ कचरे के ढेर लगे हैं। बारिश के दौरान जल निकासी की ठोस व्यवस्था न होने से परिसर में पानी भर जाता है, जिससे मच्छर व बीमारियां फैलने का अंदेशा बना रहता है।
संसाधनों की दुर्दशा: परिसर में बना पानी का टांका सूखा पड़ा है और पुराना शौचालय बेहद गंदगी से भरा हुआ है।
असुविधा और शर्मिंदगी: सराय के आगे लगे हैंडपंप पर आसपास के मजदूरों के खुले में नहाने से कीचड़ फैलता है। इससे वहां ठहरने वाली महिलाओं और यात्रियों को भारी असुविधा व शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।
वर्तमान में धर्मशाला के रखरखाव के लिए कोई सक्रिय समिति या जिम्मेदार व्यक्ति तैनात नहीं है, जिससे यह सामाजिक धरोहर धीरे-धीरे नष्ट होने की कगार पर है।
सकारात्मक पहल व जीर्णोद्धार के लिए अपील:
स्थानीय समाज बंधुओं ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए राजपूत समाज से एकजुट होकर आगे आने का आह्वान किया है।
प्रबंधन समिति का गठन: जल्द से जल्द समाज की एक विशेष बैठक बुलाकर धर्मशाला की देखरेख के लिए कार्यकारिणी का गठन किया जाए।
स्वच्छता व बेदखली अभियान: धर्मशाला से अवैध कब्जे व गोदाम तुरंत खाली करवाए जाएं और व्यापक सफाई अभियान चलाया जाए।
मूलभूत सुविधाओं का विकास: परिसर में नए शौचालय, स्नानागार, पेयजल व्यवस्था तथा बारिश के पानी की निकासी के स्थायी इंतजाम किए जाएं।
मेघ सिंह का कहना है कि सामूहिक प्रयास और सहयोग से ही इस साझा धरोहर के गौरव को पुनः लौटाया जा सकता है।