Religion
लखनऊ‑रायबरेली‑उन्नाव सीमा पर स्थित श्री भंवरेश्वर महादेव मंदिर में दिव्य दीपोत्सव
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श्री भंवरेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित दीपोत्सव में तीन जिलों के बड़े पैमाने पर श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलन और महाआरती के साथ धार्मिक उमंग का माहौल निर्मित किया।
आज लखनऊ, रायबरेली और उन्नाव जनपदों की सीमाओं पर स्थित पौराणिक श्री भंवरेश्वर महादेव मंदिर (कुर्री सुदौली) में आयोजित दीपोत्सव की रात्रि पूरी तरह शिवमय हो गई। सई नदी के तट पर विराजमान बाबा भंवरेश्वर के ऐतिहासिक दरबार को दीपों की दिव्य रोशनी से सजाया गया, जिससे मंदिर परिसर जगमगा उठा।
तीनों जिलों के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और दीपदान के लिए पहुंचे। भक्तों ने मुख्य प्रवेश द्वार, गर्भगृह और परिसर के सभी हिस्सों में कतारबद्ध होकर घी और तेल के दीपक प्रज्वलित किए। इस पावन रात्रि में बाबा भंवरेश्वर महादेव को फूलों और वस्त्रों से विशेष श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन के लिए भक्त लगातार आते रहे।
दीप प्रज्वलन के बाद पुजारियों द्वारा महाआरती आरंभ हुई। शंखनाद, डमरू की गूंज और घंटियों की आवाज़ ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने एक स्वर में 'हर-हर महादेव' के जयकारे लगाए।
इस अवसर पर उपस्थित सभी ने बाबा भंवरेश्वर महादेव से प्रार्थना की कि वे सभी भक्तों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का प्रकाश सदैव बनाए रखें। दीपोत्सव का यह आयोजन स्थानीय समुदाय में धार्मिक एकता और सांस्कृतिक समरसता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
तीनों जिलों के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और दीपदान के लिए पहुंचे। भक्तों ने मुख्य प्रवेश द्वार, गर्भगृह और परिसर के सभी हिस्सों में कतारबद्ध होकर घी और तेल के दीपक प्रज्वलित किए। इस पावन रात्रि में बाबा भंवरेश्वर महादेव को फूलों और वस्त्रों से विशेष श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन के लिए भक्त लगातार आते रहे।
दीप प्रज्वलन के बाद पुजारियों द्वारा महाआरती आरंभ हुई। शंखनाद, डमरू की गूंज और घंटियों की आवाज़ ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने एक स्वर में 'हर-हर महादेव' के जयकारे लगाए।
इस अवसर पर उपस्थित सभी ने बाबा भंवरेश्वर महादेव से प्रार्थना की कि वे सभी भक्तों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का प्रकाश सदैव बनाए रखें। दीपोत्सव का यह आयोजन स्थानीय समुदाय में धार्मिक एकता और सांस्कृतिक समरसता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।