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कलेक्टर डॉ. झाड़े ने शाजापुर में जल‑फसल संवाद कार्यक्रम का आयोजन
मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले में कम वर्षा के बीच कलेक्टर ने किसानों को कम सिंचाई में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों के चयन हेतु संवाद कार्यक्रम आयोजित किया।
कलेक्टर डॉ. परिक्षित संजयराव झाड़े ने मुख्यमंत्री जन‑विश्वास अभियान के अंतर्गत शाजापुर जिले के लखुंदर डेम पर कृषक‑जल संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य अल्प वर्षा के कारण जल उपलब्धता घटने के बावजूद किसानों को कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों के चयन के लिए मार्गदर्शन करना था।
कलेक्टर ने संबोधित करते हुए बताया कि लखुंदर एवं चीलर जलाशयों में जल की कमी के कारण सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना कठिन हो रहा है और पेयजल को प्राथमिकता देते हुए जल संचय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने किसानों से जल की महत्ता समझते हुए कम सिंचाई में उपयुक्त फसलों का चयन करने का आग्रह किया।
उप‑संचालक कृषि श्री नितेश कुमार यादव ने गेहूं की कम‑सिंचाई योग्य किस्मों और जल के वैज्ञानिक उपयोग के तरीकों पर विस्तृत जानकारी दी। जलसंसाधन कार्यपालन यंत्री श्री अनमोल टोप्पों ने भी किसानों को जल की बचत हेतु फसल चयन के महत्व पर प्रकाश डाला।
जिला पंचायत सीईओ श्री शैलेन्द्र सिंह सोलंकी, अनुविभागीय अधिकारी सुश्री मनीषा वास्कले, अतिरिक्त तहसीलदार श्री जितेन्द्र चौरसिया, जनपद पंचायत सीईओ श्री जितेन्द्र सेंगर, सरपंच तथा अन्य विभागीय अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे और अपने विचार साझा किए।
कलेक्टर ने संबोधित करते हुए बताया कि लखुंदर एवं चीलर जलाशयों में जल की कमी के कारण सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना कठिन हो रहा है और पेयजल को प्राथमिकता देते हुए जल संचय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने किसानों से जल की महत्ता समझते हुए कम सिंचाई में उपयुक्त फसलों का चयन करने का आग्रह किया।
उप‑संचालक कृषि श्री नितेश कुमार यादव ने गेहूं की कम‑सिंचाई योग्य किस्मों और जल के वैज्ञानिक उपयोग के तरीकों पर विस्तृत जानकारी दी। जलसंसाधन कार्यपालन यंत्री श्री अनमोल टोप्पों ने भी किसानों को जल की बचत हेतु फसल चयन के महत्व पर प्रकाश डाला।
जिला पंचायत सीईओ श्री शैलेन्द्र सिंह सोलंकी, अनुविभागीय अधिकारी सुश्री मनीषा वास्कले, अतिरिक्त तहसीलदार श्री जितेन्द्र चौरसिया, जनपद पंचायत सीईओ श्री जितेन्द्र सेंगर, सरपंच तथा अन्य विभागीय अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे और अपने विचार साझा किए।