📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sriya Sarkar
अपराध
जयपुर में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बाल सुरक्षा उपायों की समीक्षा की
✍️ Amar Ujala · Jaipur
🗓 29 अक्टू. 2026, 04:01 PM
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मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जयपुर में बाल अपराध रोकथाम, बाल श्रम, बाल विवाह और मानव तस्करी से निपटने के उपायों की समीक्षा की।
जयपुर, राजस्थान – राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बाल संरक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए एक उच्च‑स्तरीय बैठक का संचालन किया। पुलिस, सामाजिक कल्याण, स्वास्थ्य और विधिक विभागों के प्रतिनिधियों ने नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों की जांच, बाल श्रम और बाल विवाह को रोकने के कदमों की जानकारी दी।
बैठक में विभागीय समन्वय को सुदृढ़ करने और अपराधियों के त्वरित अभियोजन की आवश्यकता पर बल दिया गया। स्कूलों और समुदायों में जागरूकता अभियानों का विस्तार तथा तस्करी मामलों के डेटा संग्रह में सुधार की भी मांग की गई।
मुख्य सचिव ने सभी एजेंसियों से राज्य की बाल‑सुरक्षा नीति को कड़ाई से लागू करने, नियमित ऑडिट करने और पुनर्वास शेल्टरों के लिए फंड बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने कानूनी विभाग को लंबित मामलों को शीघ्रता से निपटाने के लिए विशेष कार्यवाही करने को कहा।
बैठक के अंत में एक संयुक्त निगरानी समिति का गठन और बाल‑संबंधी अपराधों की रिपोर्टिंग के लिए एक डिजिटल पोर्टल लॉन्च करने सहित कई कार्यात्मक सिफ़ारिशें तैयार की गईं।
इन कदमों को राजस्थान के नाबालिगों को शोषण से बचाने के लिए कानूनी और सामाजिक ढांचे को सुदृढ़ करने के व्यापक प्रयास के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक में विभागीय समन्वय को सुदृढ़ करने और अपराधियों के त्वरित अभियोजन की आवश्यकता पर बल दिया गया। स्कूलों और समुदायों में जागरूकता अभियानों का विस्तार तथा तस्करी मामलों के डेटा संग्रह में सुधार की भी मांग की गई।
मुख्य सचिव ने सभी एजेंसियों से राज्य की बाल‑सुरक्षा नीति को कड़ाई से लागू करने, नियमित ऑडिट करने और पुनर्वास शेल्टरों के लिए फंड बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने कानूनी विभाग को लंबित मामलों को शीघ्रता से निपटाने के लिए विशेष कार्यवाही करने को कहा।
बैठक के अंत में एक संयुक्त निगरानी समिति का गठन और बाल‑संबंधी अपराधों की रिपोर्टिंग के लिए एक डिजिटल पोर्टल लॉन्च करने सहित कई कार्यात्मक सिफ़ारिशें तैयार की गईं।
इन कदमों को राजस्थान के नाबालिगों को शोषण से बचाने के लिए कानूनी और सामाजिक ढांचे को सुदृढ़ करने के व्यापक प्रयास के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।